समीकरण हल करने का सही तरीका
November 30, 2006
यद्यपि हो सकता है गंणितीय रुप से यह मुर्खतापूर्ण लगे लेकिन Equation ‘expand‘ करने का यह एकदम सही तरीका है।
How to expand an Equation, originally uploaded by imShrish.
चुटकुला – आठ साड़ियां
November 28, 2006
पत्नी (पति से) – अजी सुनते हो, हमारी पड़ोसन आज बाजार से चार साडि़यां लेकर आई।
पति (पत्नी से) – तो क्या हुआ, कल तुम बाजार से आठ साडि़यां लेकर आना।
पत्नी - सच।
पति - सबको दिखाकर परसों वापस कर देना। साड़ी की दुकान वाला मेरा मित्र है, एक दिन के लिए साडि़यां घर लाने पर एतराज नहीं करेगा।
हरियाणवी मखौल – कारखान्यां म्ह
November 27, 2006
घुग्घू सामान्य ज्ञान मैं किम्मे घणाए कमजोर था। एक दिन वो इंटरव्यू देण जावै था। राह मैं उसती रलदू मिल ग्या। वो बोल्या – घुग्घू किम्मे परेशान दिक्खै सै। घुग्घू बोल्या – हां भाई इंटरव्यू देण जाण लाग रह्या सूं ज्यांतै परेशान सूं। रलदू बोल्या – इसमैं परेशान होण की के बात सै। इंटरव्यू आला किम्मे बी पूच्छै तो चुप ना बैठिये किम्मे नै किम्मे जवाब जरूर दिए। इंटरव्यू मैं घुग्घू तै अफसर बोल्या – आपणे देश म्ह कपड़ा कड़ै बणै सै। घुग्घू सोच-साच के बोल्या – जी कारखान्यां म्ह।
Wanted :: श्रीहरि
November 26, 2006
इस चितचोर की लाखों लोगों को तलाश है, क्या आपमें से किसी ने इसे देखा है ? यदि हाँ तो कृपया बताइए ?
Wanted Sri Hari, originally uploaded by imShrish.
यह चित्र इस्कॉन की साइट कृष्णा.कॉम पर देखा था। चित्र की थीम बहुत पसंद आई। आपका क्या विचार है।
मेरा नाम ‘श्रीश’ है
November 25, 2006
जब से हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रवेश किया है अक्सर चिट्ठाकार बंधु मेरे नाम की वर्तनी गलत लिख देते हैं जैसे ‘शिरिष‘, ‘शिरीष‘, ‘शिरिश‘, ‘शीरीश‘, ‘श्रिश‘, ‘श्रीरीश‘ आदि जो कि ‘श्रीश’ होना चाहिए। उपरोक्त लोगों की गलती नहीं है, मेरा नाम ही जरा विशेष प्रकार का है। इसलिए मैं आपको इसकी वर्तनी तथा अर्थ बताता हूँ।
‘श्रीश’ शब्द का अर्थ:
‘श्रीश’ शब्द का संधिविच्छेद है – ‘श्री:+ईश’। ‘श्री’ माने लक्ष्मी और ‘ईश’ माने ‘स्वामी या पति’ अर्थात ‘भगवान विष्णु’। यह नाम मेरे पिताजी ने रखा था जो संस्कृत के प्रवक्ता हैं। मेरे जन्म-नक्षत्र के हिसाब से नाम ‘स’ अक्षर से बनता था अत: उन्होंने ‘श्री विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्र’ के निम्न श्लोक से नाम चुना।
श्रीदः श्रीश: श्रीनिवास: श्रीनिधि: श्रीविभावनः । श्रीधरः श्रीकरः श्रेयः श्रीमाँल्लोकत्रयाश्रयः ॥७८॥
‘श्रीश’ तथा ‘शिरीष’ में भ्रमित न हों, ‘शिरीष’ एक पुष्प का नाम है। मेरे नाम को लिखने तथा बोलने में हमेशा से ही लोगों को जरा भ्रम रहा है। पर इसी नाम के कारण ही मेरी अक्सर पहचान बन जाती है। बचपन में लगता था कि पिताजी ने कैसा कठिन नाम रखा पर अब समझ आता है कि यह एक श्रेष्ठ नाम है।
‘श्रीश’ लिखा कैसे जाए:
‘श्रीमान’ वाला ‘श्री’ तथा ‘शलगम’ वाला ‘श’ लेकर ‘श्रीश’ बनता है।
BarahaIME तथा HindiWriter में कुँजियाँ दबाइए: shrIsha
Hindi Indic IME में कुँजियाँ दबाइए: shreesha
आशा है अब सभी चिट्ठाकार बंधु मेरा नाम लिखने में कठिनाई नहीं महसूस करेंगें। अब तक आप लोग तसल्ली पूर्वक बोर हो चुके होंगें इसलिए लीजिए नाम संबंधी यह चुटकुला सुनिए।
मूल चुटकुला (संस्कृत में):
मम नाम …..
जेम्स् बाण्ड् हैदराबादनगरम् आगतवान् । तस्य निरीक्षायामेव आसीत् क्श्चन कारयानचालक: । यानं प्रस्थितम् । बाण्ड् स्वशैल्या परिचयम् आरब्धवान् – ‘अहं बाण्ड् … जेम्स् बाण्ड् । भवान् ?’
चालकः अवदत् – ‘अहं सायी । शिववेङ्कटसायी । लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी । श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी । सीतारामञ्जनेयुलु राजशेखर-श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायण …….’
बाण्ड् गच्छतः यानात् कूर्दनं कृत्वा अधावत् ।
सम्भाषण – सन्देशः मार्च २००६ से साभार
हिन्दी अनुवाद:
मेरा नाम …..
एक बार जेम्स बॉण्ड हैदराबादनगर में आया। वहाँ उसकी देखरेख में कोई कार्य संपन्न होना था। वह एक कार में बैठकर चल पड़ा। बॉण्ड अपनी शैली (स्टाइल) में परिचय देने लगा – मैं बॉण्ड … जेम्स बॉण्ड। आप ?
चालक (ड्राइवर) बोला – मैं सायी। शिववेङ्कटसायी। लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी। श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी। सीतारामञ्जनेयुलु राजशेखर-श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायण …….
बॉण्ड चलती हुई कार से कूदकर भाग गया।
हरियाणवी मखौल – किलकी मार दिए
November 24, 2006
रलदू नै चोरी करण की कसूती आदत थी। एक दिन वो चोरी करदा पकड़या ग्या। थाणेदार सिपाही से बोल्या – इसकै सौ जूत मार आप्पे सीधा हो जेगा। सिपाही उसती हवालात म्ह जूत मारण खातर लेग्या तो रलदू उसती सौ का नोट दिखाकै बोल्या – किम्मे हो नी सकदा। सिपाही सौ का नोट गोज म्ह घाल कै बोल्या – मैं कांध कै जूत मारूँगा अर तूँ किलकी मारै जाइये। रलदू नै एक सौ का नोट और जेब तै काढ्या अर बोल्या – लै किलकी बी तूँ ए मार दिए मन्नै जाण दे।
हरियाणवी मखौल – नूं देखण का
November 22, 2006
नत्थू नै आंख्यां तै कम दिख्या करदा। एक दिन वो शहर म्ह तै तीन चश्मे बणवा के लियाआ। उसका छोरा बोल्या – बाबू इतणे चश्में क्यांतै बणवा के ल्याआ सै। नत्थू बोल्या - एक तो दूर की चीज देखण का सै अर एक धौरे की चीज देखण का सै। उसका छोरा पूछण लाग्या - अर यो तीसरा। नत्थू बोल्या – यो नूं देखण का सै अक कोणसा चश्मा दूर का सै, अर कोणसा चश्मा नजदीक का सै।
चुटकुला – अंदर आना मना है
November 22, 2006
पुलिस अधिकारी (सिपाही से) – जब तुम्हें पता था कि चोर कहां था, तो फिर तुमने उसे पकड़ा क्यों नहीं?
सिपाही (पुलिस अधिकारी से) – क्या करूं साहब, चोर जिस घर में घुसा था उस घर के दरवाजे पर लिखा था अंदर आना मना है।
आइना दिखाते कंगारू
November 22, 2006
सोमवार २० नवम्बर, २००६ के दैनिक जागरण में पाठकनामा स्तंभ में एक पाठक का पत्र पढ़ा, जिस पर मेरे विचार से हम सब को गौर करना चाहिए।
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने अपने देश में रह रहे मुस्लिम नागरिकों को यह स्पष्ट कर दिया कि अगर वे देश के कानून को नहीं मानते तो वह देश छोड़कर जा सकते हैं। यहाँ के प्रधानमंत्री ने मुसलमानों की एक सभा में कहा कि ऑस्ट्रेलिया एक लोकतांत्रिक और सेक्युलर देश है। यहाँ सारे कानून संसद वनाती है और देश में एक ही कानून चलेगा, यदि कोई संसद से स्वीकृत कानून के अतिरिक्त शरिया कानून मानता है तो वह देश छोड़कर वहाँ जाकर रह सकता है जहाँ शरियत कानून चलता है। यह देश उन्हीं के लिए है जो यहाँ का कानून मानता हो। भारत को इससे सबक लेना चाहिए। जहाँ धर्मनिरपेक्षता के नाम तुष्टीकरण की नीति चलायी जाती है। वोट बैंक के लालच में आतंकवादियों तक को सहयोग, सहायता, समर्थन व संरक्षण दिया जाता है।
मधु पोद्दार, पटेल नगर, गाजियाबाद
लेखक ने बिल्कुल सही बात कही है, सरदार पटेल ने भी पाकिस्तान परस्त मुस्लिमों को कहा था कि अगर उन्हें पाकिस्तान से ही प्यार है तो वे वहाँ जाकर रहने के लिए स्वतंत्र हैं। भारत में रहने वाले सभी मुस्लिमों और हमारा खून एक ही है, परंतु फिर भी जो हमें अपना नहीं मानते, हमारे कानून नहीं मानते, हमारा खून बहाते हैं उन्हें हमने कहाँ पकड़ रखा है वे अपने पसंद के देश क्यों नहीं चले जाते।
‘पृथ्वी’ का सफल परीक्षण
November 22, 2006
कुछ समय पूर्व पीएसएलवी तथा आकाश के परीक्षण असफल हो जाने के बाद शुक्र है कि पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र का रविवार को परीक्षण सफल हुआ। आशा है इससे निरुत्साहित हुए रक्षा वैज्ञानिकों में फिर से उत्साह का संचार होगा।
बालासोर (उड़ीसा) : सतह से सतह पर मार करने वाले म्ध्यम दूरी के आधुनिकतम प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी का समुद्र की सतह पर चाँदीपुर तट स्थित समन्वित परीक्षण रेंज (आईटीआर) से रविवार को सफल परीक्षण किया गया। हालांकि ७०० किलोग्राम विस्फोटक सामग्री से लदी होने पर मिसाइल की मारक क्षमता १५०-२५० किलोमीटर तक है, लेकिन विस्फोटक सामग्री की जरुरत पड़ने पर इसे एक हजार किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है। यह १५० किमी तक लक्ष्य भेदने में केवल ३०० सेकेंड लगाती है। आईटीआर सूत्रों ने बताया कि रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित इस मिसाइल को सुबह ९.५५ बजे मोबाइल लाँचर से दागा गया और उसने सफलता पूर्वक लक्ष्य को भेद दिया। मिसाएल की लंबाई ८.६५ मीटर और चौड़ाई १ मीटर है। यह सेना में शामिल कर ली गई है। इसके रखरखाव और संचालन के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित दो प्रक्षेपास्त्र समूह गठित किए गये हैं।
दैनिक जागरण २० नवम्बर २००६, से साभार
रक्षा वैज्ञानिकों की योजना भविष्य में पीएसएलवी तथा आकाश की मिश्रित प्रौद्योगिकी से अंतरमहाद्विपीय मिसाएल सूर्या बनाने की थी। यदि कुछ समय पूर्व उपरोक्त दोनों के परीक्षण असफल न हुए होते तो शायद इस दिशा में कार्य आरंभ हो चुका होता। अब इन दोंनों का अगला परीक्षण शायद अगले साल तक हो। खैर सहज पके सो मीठा होए यानि Better Late Then Never.





