॥श्री गणेशाय नमः॥ ॥सरस्वत्यै नमः॥ ॥महर्षि अगस्त्य विजयते॥

॥तुंगेश्वराय नमः॥ ॥जय बद्री विशाल॥ ॥जय बाबा केदारनाथ॥

नमस्कार आप लोग सोच रहे होंगे कि ई-पंडित ने तो आते ही मंत्र पढ़ने शुरु कर दिये। दरअसल हमारे यहाँ रिवाज है कि नया काम शुरु करने से पहले इष्टदेव को याद करते हैं। खैर, काफी दिन से हिन्दी में लिखने की सोच रहा था, कोई २-३ महीने पहले हिन्दी चिट्ठाजगत से परिचय हुआ। हुआ यह कि एक बार मैं देवेंद्र परख जी का HindiWriter प्रयोग कर रहा था तो सोचा गूगल पर कुछ हिन्दी शब्द खोज कर देखूं कि क्या होता है।तो भाई HindiWriter से टाइप करके गूगल में डाला तो कुछ हिन्दी चिट्ठों (ब्लॉग्स) पर पहुँचा, फिर क्या था एक चिट्ठे से दूसरे चिट्ठे पर चलता ही गया।

पहले मैं सोचता था कि हिन्दी कुछ अखबारी और सरकारी साइटों तक ही सींमित है परंतु मुझे पता लगा कि चिट्ठों के माध्यम से हिन्दी नेट पर तेजी से पैर पसार रही है। फिर एक दिन रमण कौल जी से मुझे परिचर्चा और गूगल चिट्ठाकार समूह का पता चला। बाद में ज्ञात हुआ कि हिन्दी चिट्ठाकारी को सर्वमान्य, सर्वप्रिय बनाने में अक्षरग्राम परिवार का काफी योगदान है (इस बारे में विस्तार से फिर लिखूँगा)। खैर तभी से सोच रहा था कि अब हिन्दी चिट्ठा शुरु करुँ, आखिर वह दिन आ ही गया।

हिन्दी चिट्ठाजगत में इस नवप्रवेशी चिट्ठाकार को आप सब की शुभकामनांए इच्छित हैं।

5 Responses to “हिन्दी चिट्ठाजगत में ई-पंडित की दस्तक”


  1. हिन्दी चिट्ठाकारों के बढते समूह मे शीरीश भाई ,आपका स्वागत है। मगर यह आपने कमेन्ट्स का दरवाजा क्यों बन्द कर रखा है।

  2. Shrish Says:

    धन्यवाद प्रभात जी।
    दरवाजा बंद नहीं था दरअसल वह पोस्ट टाईटल ज्यादा लंबा हो गया था, इसलिए पोस्ट का पर्मालिंक काम नहीं कर रहा था, मैंने उसे ठीक कर लिया है तथा आपकी कमेन्ट भी यहाँ शिफ्ट कर दी है।


  3. हिन्दी चिट्ठे जगत पे आपका स्वागत है


  4. मेरी तरफ़ से भी स्वागत है भाई शिरीषजी.


  5. श्रीश भाई, स्वागत है हिन्दी चिट्ठा जगत में, यहाँ मेरा आगमन भी कुछ आपकी ही तरह हुआ है। आपके चिट्ठे लगता है कि तकनीक के साथ-साथ संस्कृत की भी जानकारी मिलती रहेगी।


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