हरियाणवी मखौल – मर्द सै मर्द
November 19, 2006
ताई धापली रेल म्ह बैठी जाण लागरी थी। एक टेशन पै गाडी रुकी तो सफेद जींस की पैंट-शर्ट पहरे, लंबे-लंबे बालां आला एक छोरा डिब्बे म्ह चढ़ग्या। उसनै कानां म्ह बाली भी पहर राक्खी थी। ताई धापली नै उसती देखकैं समझया अक या लुगाई सै। ताई उसके धोले कपड़े देखकै बोल्ली, बेटी तेरे गेल तो माड़ी बणी, तूं तो जवानी मैं ए विधवा होगी। ओड़े खड़या एक छोरा बोल्या, ताई मर्द सै मर्द। या सुणके धापली बोल्ली, फेर तो और बी माड़ी बात सै मर जांणा इसनै चूड़ियां के पिस्से बी कोनी देंदा।




November 20, 2006 at 12:11 pm
लो बोलो कर ल्यो बात!