चुटकुला – आठ साड़ियां
November 28, 2006
पत्नी (पति से) – अजी सुनते हो, हमारी पड़ोसन आज बाजार से चार साडि़यां लेकर आई।
पति (पत्नी से) – तो क्या हुआ, कल तुम बाजार से आठ साडि़यां लेकर आना।
पत्नी - सच।
पति - सबको दिखाकर परसों वापस कर देना। साड़ी की दुकान वाला मेरा मित्र है, एक दिन के लिए साडि़यां घर लाने पर एतराज नहीं करेगा।




November 28, 2006 at 12:19 pm
गतांक से आगे—
पत्नी चट से साड़ियां ले आई और झट से फाल लगा कर सब को दिखा आई। दूसरे दिन मित्र दुकानदार ने फाल लगी साड़िया वापिस लेने से जब मना कर दिया तो पतिदेव को मजबूरन उधार चुकता करना पड़ा।
Moral of the story– पिंक से पंगा नहीं लेने का।
November 28, 2006 at 2:42 pm
यह तो नहले पर दहला हो गया.
November 28, 2006 at 8:44 pm
इसे कहते है । जोर का झटका धीरे से लगा चुटकूला अच्छा है।
और जवाब और भी अच्छा है।
November 28, 2006 at 10:15 pm
वाह भाई जवाब नही जवाब का
November 29, 2006 at 2:49 am
नहले पर दहला तो होगा ही,रत्ना जी को जैसे को तैसा का अनुभव जो है।
November 29, 2006 at 6:08 am
सही है..नहला भी और दहला भी!!
November 29, 2006 at 8:21 am