समीकरण हल करने का सही तरीका
नवम्बर 30, 2006
यद्यपि हो सकता है गंणितीय रुप से यह मुर्खतापूर्ण लगे लेकिन Equation ‘expand‘ करने का यह एकदम सही तरीका है।
How to expand an Equation, originally uploaded by imShrish.
ई-पंडित की ई-पोथी
यद्यपि हो सकता है गंणितीय रुप से यह मुर्खतापूर्ण लगे लेकिन Equation ‘expand‘ करने का यह एकदम सही तरीका है।
How to expand an Equation, originally uploaded by imShrish.
नवम्बर 30, 2006 at 9:48 पूर्वाह्न
पंडितजी मेरे बेटे की उत्तरबही आपके पास कहाँ से आ गई?
नवम्बर 30, 2006 at 3:00 अपराह्न
हा-हा-हा।
नवम्बर 30, 2006 at 7:10 अपराह्न
कौन से स्कूल में पढ़ रहा है यह बालक!!
और संजय भाई, बेटे का नाम पीटर तो बहुत प्यारा रखा है!! उसे अंतर्राष्ट्रिय गणित प्रतियोगिता में भेजें…:)
नवम्बर 30, 2006 at 8:22 अपराह्न
भाई लोग माफ करें, इस प्रकार से हल निकालने में मेरा बेटा सिद्धहस्त है इसलिए मुझे लगा उसकी कॉपी पंडितजी के हाथ लग गई है. जानकर निराशा हुई की वही एकमात्र महान गणितज्ञ नहीं है दुनियाँ में.
नवम्बर 30, 2006 at 8:23 अपराह्न
ऊपर पंकज के नाम से की गई टिप्पणी दरअसल मेरी है, कृपया ठीक कर दें
नवम्बर 30, 2006 at 10:54 अपराह्न
आपके गणित ज्ञान के आगे तो मै नत मस्तक हो गया । कहाँ है आपके चरण और उन पर सज रहे खडाऊँ।
दिसम्बर 1, 2006 at 3:59 अपराह्न
@ संजय बेंगाणी,
पीटर आपका बेटा है पता नहीं था, खैर बहुत ही Innovative Thinking है उसकी।
अद्यतन: निराश न होइए। उसे हमारी इस पाठशाला में लाते रहिएगा, उसके जैसा गणितज्ञ दूसरा न होगा।
@ समीर लाल,
यह बालक फिलहाल तो पता नहीं कहाँ पढ़ रहा है पर इसे हमारी पाठशाला में होना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय गणित प्रतियोगिता की अच्छी तैयारी हो जायगी।
@ डॉ. प्रभात टंडन,
डॉक्टर साहब, अपने गणित ज्ञान के उदाहरण आगे भी देता रहूँगा, आखिर गणित का अध्यापक जो ठहरा।
दिसम्बर 2, 2006 at 10:49 पूर्वाह्न
श्रीश जी, इस अद्भुत बुद्धि वाले बच्चे के और भी पेपर देखे हैं मैने.वाकइ सब एक से बढकर एक हैं!
दिसम्बर 26, 2006 at 6:48 पूर्वाह्न
[...] लो जी हम बेकार ही रश्क़ कर रहे थे कि क़ाश पीटर हमारी पाठशाला में होता। अभी मालूम पड़ा पीटर जैसे कई ‘मेधावी’ छात्र मेरे चेले हैं। आजकल हरियाणा के विद्यालयों में प्री-बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। अब इस बार से हमारे शिक्षा बोर्ड ने सेमेस्टर प्रणाली लागू की है। प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं अभी सितम्बर में हुई थीं जिस कारण द्वितीय सेमेस्टर का सिलेबस अभी पूरा नहीं हो पाया। लेकिन इन प्री-बोर्ड परीक्षाओं में पूरा ही सिलेबस आना था तो जो सिलेबस अभी नहीं हुआ था उसके प्रश्न बच्चों ने अपनी बुद्धि से दिए। उनकी ‘इनोवेटिव थिंकिंग’ देखकर एक ही बात समझ आती है – ‘यथा गुरु तथा चेला’। लीजिए आप भी कुछ नमूने देखिए। मेरे पास स्कैनर नहीं है इसलिए टाइप कर के पोस्ट कर रहा हूँ वरना ज्यादा अच्छा रहता। [...]
दिसम्बर 27, 2006 at 8:39 अपराह्न
यह बताइये,
इसमें गलत क्या है ??
बेचारे ने expand ही तो किया है ….
-हिमांशु
दिसम्बर 16, 2009 at 4:51 अपराह्न
[...] जी हम बेकार ही रश्क़ कर रहे थे कि क़ाश पीटर हमारी पाठशाला में होता। अभी मालूम पड़ा पीटर जैसे कई ‘मेधावी’ [...]