तीन दिन की ऑफलाइन कैद
दिसम्बर 20, 2006
पिछले तीन दिन से मेरा BSNL का ब्रॉडबैंड कनेक्शन ठप था। रविवार सुबह बड़े अच्छे मूड में था कि छुट्टी का दिन मजे से संजाल पर बिताया जाए। लो जी संजाल पर जाने के लिए लॉगइन करने लगा तो संदेश मिला:
Error 678 – The remote computer is not responding.
इस संदेश से मुझे डायलअप के जमाने से ही नफरत है जहाँ यह संदेश मिला समझो गई भैंस पानी में। खैर थोड़े-थोड़े समय अंतराल के बाद बार-बार कोशिश की लेकिन कनेक्ट नहीं हुआ। लो जी किया BSNL वालों के दिए मोबाइल नंबर पर फोन तो जैसी उम्मीद थी पहले तो बोले फोन ठीक है, मोडेम ठीक है, LAN कार्ड ठीक है। ये इन लोगों का नियम होता है कि अपनी गलती न मानकर अगले को ही बोलते हैं कि तुम्हारे ही सिस्टम में प्रॉब्लम होगा। पहली बार जब ये कनेक्शन लगाने आये तो बोले कि LAN कार्ड जरुरी है उसके बिना सेटअप नहीं हो सकता तब मैंने अपने कम्प्यूटर वाले की मदद से USB से कनेक्शन सेट किया था। खैर मैंने कहा सब एकदम ठीक है जी, फिर बोले भईया आज तो रविवार है कुछ नहीं हो सकता कल फोन करना …
अगले दिन सोमवार को फोन किया तो बोले मोडेम पर लिंक वाला इंडीकेटर नहीं आ रहा न, मैंने कहा हाँ भई हाँ। बोले इधर पीछे से ही प्रॉब्लम आ रहा है कल तक ठीक हो जाएगा …
अगले दिन मंगलवार को भी यही कहानी दोहराई गई। और आज बुधवार को जाकर ठीक हुआ। शुक्र राम जी का, मैं तो सोच रहा था कि अब शायद १०-१५ दिन बाद जाकर ही ठीक हो पाएगा। लाख पब्लिसिटी कर ले BSNL कि मैं देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी हूँ लेकिन काम करने का वही सरकारी तरीका, और एक फॉल्ट दूर करने में तीन दिन लगाता है। भगवान मालिक है !
एक बार सोचा BSNL का Netone वाला डायलअप अकाऊंट ही प्रयोग करुं लेकिन वही पुरानी समस्या कनेक्ट बाद में होता है डिसकनेक्ट पहले हो जाता है। डायलअप के बारे में अपनी दुख भरी कहानी फिर कभी तफसील से बयान करुंगा।
तीन दिन ऑफलाइन जिंदगी कैसे गुजरी मैं ही जानता हूँ। कुछ तो पहले से ही इंटरनेट किए बिना खाना हजम नहीं होता था ऊपर से आजकल सुबह शाम चिट्ठे पढ़े बिना नींद भी नहीं आती। नारद जी की याद सताती थी। सोचता था परिचर्चा, चिट्ठा-चर्चा में क्या चल रहा होगा आदि-आदि।
खुदा ऐसे बुरे दिन खुदा को भी न दिखाये !![]()
अपडेट: अभी-अभी पता चला है कि संत कबीर ने सालों पहले इस व्यथा को समझ लिया था। कविवर समीरलाल जी ने इस सत्य को यहाँ दोहा नंबर- एक में उदघाटित किया है। धन्य हैं हे कवीन्द्र आप, इसी लिए तो कहा गया है – “जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि”




दिसम्बर 20, 2006 at 6:10 अपराह्न
“नारद जी की याद सताती थी। ”
-अब जब तक कनेक्शन चालू है, नारद की एक फोटो तो कम्प्यूटर पर उतार ही लो, ताकि बुरे वक्त में काम आये. इस मुए कनेक्शन का क्या भरोसा.
दिसम्बर 20, 2006 at 9:10 अपराह्न
इन सरकारी कंपनियों की यही तकलीफ़ है जब तक कनेक्शन चालू रहेगा बहुत बढ़िया काम करेगा, जब बन्द हो गया तो फ़िर भगवान ही मालिक है। कोई सही से उत्तर भी नही देगा।
आप तो किस्मत वाले हो जो तीसरे दिन कनेक्शन चालु तो हो गया है, आपको तो विभाग को इतना जल्दी (?) आपकी समस्या सुलझा देने के लिये धन्यवाद देना चाहिये।
दिसम्बर 20, 2006 at 11:51 अपराह्न
@ समीर लाल,
हंस लो जी, आप तो उड़नतश्तरी में बैठकर कनाडा चले गए इधर की तकलीफें आपको क्या मालूम। टेलीफोन, इंटरनेट जैसी सरकारी चीजें खराब क्या हुईं ठीक होने का नाम नहीं लेती।
@ सागर चन्द नाहर,
हाँ ठीक ही कह रहे हैं, सागर जी। डायलअप कनेक्शन के जमाने में एक बार कनेक्शन ठप हो जाने पर ठीक २० दिन ऑफलाइन रहना पड़ा था।
दिसम्बर 22, 2006 at 8:51 पूर्वाह्न
b.s.n.l ब्राडबैंड को श्रीश आप यूजर और पासवर्ड से चला रहे हैं या always on से जहाँ पासवर्ड नहीं डालना पडत्ता। मेरे ख्याल से यूजर और पासवर्ड का विकल्प अधिक सही रहता है , मैने कई बार देखा कि कनेक्ट तो हो जाता है लेकिन साईट नही खुलती । उस समय sent speed और recieved speed को चेक करें। अक्सर sent speed तो सही मिलती है लेकिन recieved speed मुशिकल से 150-500 के बीच मे दिखाती है, इस हालत मे साईट खुल नहीं पायेगी। Data One को disconnect करें और दोबारा कनेक्ट करें। 2-3 बार कोशिश करने पर कनेक्शन हो जाता है और स्पीड भी सही मिल जाती है। always on कनेकशन मे यह विकल्प नही रहता और सरकार भरोसे ही बैठना पडता है।
दिसम्बर 22, 2006 at 2:12 अपराह्न
सच में, अब तो ‘कनेक्टिविटी’ के बिना जीवन अधूरा लगने लगता है . बहुत सही लिखा है आपने .
दिसम्बर 22, 2006 at 3:50 अपराह्न
@ डा प्रभात टन्डन,
अरे डॉक्टर साब, वैसे ही लिमिट (1 GB) पार होने का खतरा बना रहता है, Always On में चलाऊंगा फिर तो गया मैं काम से। पहले २५० रुपए/महीना वाला कनेक्शन था जिसमें 250 MB लिमिट होती थी उसमें लिमिट क्रॉस होने से मेरा बहुत बिल ठुका। फिर यह ५०० रुपए/महीना तथा 1 GB लिमिट वाला कनेक्शन लिया। इसमें अब दिन में संयम बरतता हूँ और डाउनलोड वगैरह रात को फ्री ऑवर्स में करता हूँ।
आपने जो टिप ऊपर बतायी वह काम करती है और मैं अक्सर इस्तेमाल करता भी हूँ पर इस बार परमानेंट ठप हो गया था।
दिसम्बर 16, 2009 at 5:07 अपराह्न
[...] के लिए चुनाव होने जा रहे हैं। तीन दिन की कैद में थे तो पता ही नहीं चल पाया खैर अभी [...]