पीटर मेरे स्कूल में
December 26, 2006
लो जी हम बेकार ही रश्क़ कर रहे थे कि क़ाश पीटर हमारी पाठशाला में होता। अभी मालूम पड़ा पीटर जैसे कई ‘मेधावी’ छात्र मेरे चेले हैं। आजकल हरियाणा के विद्यालयों में प्री-बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। अब इस बार से हमारे शिक्षा बोर्ड ने सेमेस्टर प्रणाली लागू की है। प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं अभी सितम्बर में हुई थीं जिस कारण द्वितीय सेमेस्टर का सिलेबस अभी पूरा नहीं हो पाया। लेकिन इन प्री-बोर्ड परीक्षाओं में पूरा ही सिलेबस आना था तो जो सिलेबस अभी नहीं हुआ था उसके प्रश्न बच्चों ने अपनी बुद्धि से दिए। उनकी ‘इनोवेटिव थिंकिंग’ देखकर एक ही बात समझ आती है – ‘यथा गुरु तथा चेला’। लीजिए आप भी कुछ नमूने देखिए। मेरे पास स्कैनर नहीं है इसलिए टाइप कर के पोस्ट कर रहा हूँ वरना ज्यादा अच्छा रहता।
प्रश्न: जनन किसे कहते हैं ? जनसंख्या वृद्धि रोकने के कुछ उपायों का वर्णन करो।
उतर: बच्चे पैदा होने को जनन कहते हैं। लड़का पैदा होने को लोग अच्छा समझते हैं पर ये ठीक बात नहीं है। ज्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए, इससे बेरोजगारी बढ़ती है जिससे कई लोग तो भूखे सोते हैं। जनसंख्या रोकने के लिए कुछ उपाय निम्न हैं:
- हमें जनसंख्या पर रोक लगानी चाहिए।
- हमें लोगों को उत्साहित करना चाहिए कि वे ज्यादा बच्चे पैदा ना करें।
- एक या दो बच्चों से अधिक बच्चे ना करें।
- शादी से पहले बच्चे नहीं करने चाहिए।
- बच्चों को भी ये बात समझानी चाहिए कि वो भी ज्यादा बच्चे पैदा ना करें।
- आजकल लोगों को महंगाई में तो बच्चे देख के पैदा करने चाहिए।
(काश ये उपाय भारत सरकार को पता होते तो आज इतनी जनसंख्या न होती)
प्रश्न: रंगीन काँच किस प्रकार बनाया जाता है ?
उतर: रंगीन काँच बनाने के लिए काँच को पिघलाकर उसमें अनेक प्रकार के रंग मिलाकर रंगीन काँच बनाया जाता है।
(इटस सो सिम्पल यार)
प्रश्न: वायु में सीसे के क्या स्त्रोत हैं ? इससे क्या हानियाँ हो सकती हैं ?
उतर: जब कहीं काँच आदि टूट जाए तो वायु में सीसे कण फैल जाते हैं। ये बहुत बारीक होते हैं जो सांस के साथ अंदर चले जाते हैं। जिसके ऊपर गिर जाए उसका तो बीमार होना निश्चित है। इससे आदमी मर भी सकता है।
(हे भगवान मुझे पता नहीं था आगे से सावधान रहूँगा)
प्रश्न: विद्युत-धारा से क्या तात्पर्य है ? इसके उपयोग लिखो।
उतर: बिजली की तार में जो होता है उसको विद्युत-धारा बोलते हैं। इसको छूने से करंट लगता है। इससे सब बिजली की चीजें चलती हैं जैसे पँखा, बल्ब, टीवी आदि। छोटे बच्चों को इससे दूर रखना चाहिए। करंट लगने से मौत भी हो सकती है।
(एकदम सही फरमाया है न)
प्रश्न: खेत की तैयारी किसे कहते हैं ? इसके क्या लाभ हैं ?
उतर: खेत में फसल उगाने के लिए जो भी काम करते हैं उसे खेत की तैयारी कहते हैं। खेत में उगाई गई फसल को काटने के बाद हमें खेत को खाली छोड़ देना चाहिए। अगर उसमें एक ही बीज बोओगे तो हमारे खेत की मिट्टी मर जाएगी। इसलिए हमें आए साल उसमें दाल, गन्ना, आलू जैसे कई प्रकार के फसल लगानी चाहिए। खाद भी गेरनी चाहिए इससे खेत में जान आती है।
(गांव का बच्चा था अपना पूरा ज्ञान बांट दिया)
प्रश्न: कोक के दो उपयोग लिखो।
उतर: कोक के निम्नलिखित उपयोग हैं:
- माँ अपनी कोक से बच्चे को जन्म देती है।
- और उसे दूध भी पिलाती है।
- दुकानदार इसको आइसक्रीम और केक में डालते हैं।
- कोक का उपयोग कोका-कोला में भी होता है।
(रामदेव बाबा को जाकर बताओ भाई कोई, नाहक कोक को बदनाम करते हैं)
अब आप ही बताओ भाई, सब कुछ तो ‘सही’ लिखा है। कुछ गलत लिखा हो तो बोलो। हम नंबर दें या न दें ?




December 26, 2006 at 10:06 am
धन्य हो गुरू. भारत का भविष्य आपके शिष्य के हाथों एकदम सुरक्षित है. हम और आप अब चैन से मर सकते हैं.
December 26, 2006 at 10:12 am
कोक को कीट नाशक न बाताये जाने के कारण भारत सरकार की तरफ से बालक को फेल घोषित किया जाता है….भले ही बाकी उत्तर सही हैं।
घोषणा मंत्री
December 26, 2006 at 12:30 pm
श्रीश जी यदि यह सच की उत्तरपुस्तिकाएं हैं तो यह गंभीर मामला है और प्रश्न चिन्ह पढ़ाने वालों पर लगता है।
वैसे बच्चों कि कल्पनाशीलता कमाल की है
December 26, 2006 at 1:06 pm
हम जब बिहार की साइकिल यात्रा पर थे तो एक अध्यापक ने चिंता प्रकट करते हुये कहा था-हमको यह चिंता नहीं है कि हमारे यहां नकल होती है। हमको चिंता तो इस बात की है कि अगर यही चलता रहा तो अगली पीढ़ी को नकल कौन करायेगा! आपकी पोस्ट पढ़कर उस अध्यापक की बात याद आती है!:)
December 26, 2006 at 4:47 pm
@ संजय बेंगाणी,
सही कहा भैये लेकिन जिस दिन मरे इकट्ठे मरेंगे वरना अगर सब चिट्ठाकार मर गए और एकाध जिन्दा बच गया उसके चिट्ठे पर टिप्पणी कौन करेगा।
@ समीर लाल,
सही फरमाया जी, बेचारे अबोध बच्चे को ये मेन बात तो ध्यान ही न रही।
@ जगदीश भाटिया,
उतरपुस्तिकाएं १००% सच्ची हैं, मैंने अतीत में ऐसी कई मजेदार उतरपुस्तिकाएं देखी हैं। बच्चे अक्सर जिन प्रश्नों का उतर न पता हो अपने हिसाब से सोच कर लिख देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं कि उनके सभी जवाब ही गलत थे। जैसे मैंने कहा कि उपरोक्त यूनिट अभी पढ़ाये नहीं गये थे उन्हीं में बच्चों ने कलाकारी दिखाई है।
वैसे टेक्नीकली देखा जाए तो प्रश्न सँख्या दो और तीन को छोड़कर बाकी के उतर गलत भी नहीं।
@ अनूप शुक्ला,
नकल विषय पर तो एक अलग पोस्ट लिखे जाने की जरुरत है।
December 26, 2006 at 5:44 pm
जब मैं कक्षा तीन में पढ़ता था तब हिन्दी की परीक्षा में पूछा गया प्रश्न आज तक मुझे याद है, और प्रश्न का उत्तर जो मैने लिखा था आज २८ वर्ष के पश्चात फिर से आप के मनोरंजन के लिये लिख रहा हूँ, प्रश्न महिलाओं की पर्दा प्रथा पर था कि
क्या पर्दा प्रथा जरूरी है?
उत्तर: जी बिल्कुल जरूरी है, क्यों कि घर मैं कोई मेहमान आ जाये तो अच्छा नहीं लगता। ( मैने पर्दा यानि दरवाजों पर लगाने वाले पर्दे को समझ कर उत्तर लिख दिया था) इससे यह साबित होता है कि बच्चों की कल्पना शीलता तन भी ऐसी ही हुआ करती है।
एक बार पापाजी को मैने पूछा बताइये पापाजी घर्षण बल किसे कहते है? पापाजी मजाक के मूड में थे सो कह दिया मुझे पता नहीं तो मैने कहा
आप भी जब तीसरी में आओगे तब पता चलेगा!!!!
December 26, 2006 at 6:18 pm
बहुत ही बढि़याँ श्रीश जी,
माँ की गोद को कोख कहते है। कोक का अर्थ कुछ दूसरा ही होता है।
December 26, 2006 at 9:16 pm
“शादी से पहले बच्चे नहीं करने चाहिए।”बहुत खूब, क्या कल्पना ह। अब लगने लगा है कि भारत एक नये युग मे प्रवेश कर रहा है।
December 27, 2006 at 7:28 am
@ सागर चन्द नाहर,
हे हे, सागर जी, आप भी पढ़ रहे होते तो आपको भी अपनी पाठशाला में बुला लेते। खैर कोई बात नहीं ऑनलाइन पाठशाला में आते रहिएगा।
@Pramendra Pratap Singh,
मुझे तो पता है प्रमेन्द्र जी, लेकिन उसको नहीं न पता रहा होगा।
@ PRABHAT TANDON,
एकदम सही कह रहे हो जी। सोचने वाली बात है।
December 27, 2006 at 3:41 pm
वाह भाई, बहुत ही मेधावी बच्चे हैं
December 27, 2006 at 8:42 pm
इस बच्चे का मजाक मत उङाइये,
ऐसे ही बच्चे बाद में बङा काम करते हैं
-हिमांशु