स्माईलगिरी कैसे करें
December 28, 2006
आज एक स्माईली मेरेको मिलने कू आया। मैं बोला कईसा है रे तो बोला क्या बताऊं जी बोत टेन्शन में हूँ। मैंने कहा कायकू भाई आजकल तो तू बोत हिट होरेला है जिसको देखो वई स्माईलगिरी कर रेला है। बोला यई तो लोचा है बाप जबसे वो उड़नस्वामी ने लोगों को अन्यथा नई लेने को बोला है मेरी तो वाट लग गई है। मैं बोला अबे तू तो पोपुलर हो गया यार मैं तो बोलता हूँ आज लास्ट दिन है तू भी चिट्ठा लिखना शुरु कर और चुनाव में खडा़ हो जा। बोला खालीपीली कायकू लेरे ओ बाप, वर्क-लोड एकदम बढ़ गया है, भाई लोग मेरे को सांस नी लेने देरे खासकर टिप्पणियों में। कोई उपाय बताओ ना पंडित जी। मैं बोला ठीक है भाई अपुन ट्राई करता है आगे भाई लोगों की मर्जी। तो भाई लोग आज की क्लास में अपुन बताएगा कि स्माईलगिरी कैसे करने का है।
स्माईलियों का इतिहास भूगोल बताकर बोर नहीं करुंगा जिन को जानना हो नीचे दी गई कड़ियों पर जाएं। स्माईली दो प्रकार के होते हैं – टेक्स्ट तथा ग्राफिक। मैं यहाँ सिर्फ ग्राफिक स्माईली दे रहा हूँ (बिना Quotes के प्रयोग करें)। मेरे विचार से ब्लॉगर ग्राफिक स्माईली नहीं दिखा सकता।
=”:)” या “:-)” या “:smile:”
= “:D” या “:-D” या “:grin:”
= “:(” या “:-(” या “:sad:”
= “:o” या “:-o” या “:eek:”
= “8O” या “8-O” या “:shock:”
= “:?” या “:-?” या “:???:”
= “8)” या “8-)” या “:cool:”
= “:x” या “:-x” या “:mad:”
= “:P” या “:-P” या “:razz:”
= “:|” या “:-|” या “:neutral:”
= “;)” या “;-)” या “:wink:”
= “:lol:”
= “:oops:”
= “:cry:”
= “:evil:”
= “:twisted:”
= “:roll:”
= “:!:”
= “:?:”
= “:idea:”
= “:arrow:”
= “:mrgreen:”
फोरमों के मामले में कुछ स्माईली सभी फोरमों के लिए काम नहीं करते। परिचर्चा के लिए स्माईली कोड यहाँ पर दिए गए हैं।
फायरफॉक्स में स्माईली ही स्माईली:
फायरफॉक्स के लिए Smiley Xtra नामक एक्सटेंशन यहाँ से डाउनलोड तथा इंस्टाल करें। इससे Smiley Xtra का आइकॉन फायरफॉक्स के टूलबार पर आ जाएगा।
इस पर क्लिक करने से यह साइडबार में खुल जाएगा।
चिट्ठे पर स्माईली लगाने के लिए HTML एडीटर में जाकर Smiley Xtra के साइडबार में बायें से चौथा आइकॉन तथा परिचर्चा आदि फोरम के लिए पोस्ट एडीटर में जाकर बायें से तीसरा आइकॉन क्लिक करें। इससे क्रमशः HTML तथा BBCode इन्सर्ट हो जाएगा।
विंडोज लाइव राइटर में Spaces Emoticon:
विंडोज लाइव राइटर के लिए Insert Spaces Emoticon प्लगइन यहाँ से डाउनलोड तथा इंस्टाल करें। अब WLW में Insert मीनू में जाकर A Spaces Emoticon… पर क्लिक करें।
जिससे नीचे वाली विंडो खुल जाएगी।
बस अपनी पसंद का स्माईली चुनिए और OK क्लिक करिए।
तो भाईलोग स्माईलगिरी करो बिंदास होके। 
संबंधित कडियाँ:
Smiley के बारे में विकीपीडिया पर
Emoticon के बारे में विकीपीडिया पर
Using Smilies « WordPress Codex




December 28, 2006 at 5:42 pm
श्रीश जी,
आप के आने से हम जैसों के भाग्य खुल गये,
हमे कुछ नही आता था अब मास्टर जी बन गये।
मास्टर जी बन गये किन्तु ज्ञान अभी है अधूरा
जिसे करना है आपको अपनी लेखनी से पूरा
ताकि अगले वर्ष हम भी नये कारनाम करे।
और गांधी गिरी के झूले मे बैठ कर
स्माईली गिरी के पैग भरे।
हमें आशा नही विश्वास है कि
आप अपने पडि़त को सोने नही देगे।
नई नई जानकरी देकर हमें रोने नही देगें।
अब यह कहना कि अच्छा लिखा है,
यह आपके अच्छे लेख की तौहीन होगी।
अगले लेख मे नई टिप्पणी इसकी गवाह होगी।
December 28, 2006 at 6:19 pm
प्रमेन्द्र जी ये तो बस आपका प्यार है,
वरना हम को भी कहाँ कुछ खास आता यार है।
हिन्दी में कोई तकनीकी पोस्टें लिखता नहीं यही तो एक लोचा है,
पर कसम काली माई की हमने भी इस कमी को पूरा करने का सोचा है।
पंडित जी को हम सोने नहीं देंगे आपको हम रोने नहीं देंगे,
आते रहना हमारी पाठ्शाला में शिकायत आपको होने नहीं देंगे।
December 28, 2006 at 6:43 pm
सबसे पहले तो धन्यवाद अच्छे लेख के लिये, अब आपके दिये स्माइलीकोन का प्रयोग कर देकते हैं
क्या लेख लिखा है,
यह भी (अन्यथा ना लेने के लिये)
अब नियम के अनुसार अन्त में
December 28, 2006 at 7:26 pm
A lot of thanx.
December 28, 2006 at 7:37 pm
वाह, सही पाठशाला लगाये हैं, पंडित जी. मजा आ गया. बड़ी ज्ञानवर्धक रही आपकी यह पोस्ट. ऐसे ही ज्ञान वितरण करते हैं. शुभकामनायें एवं बधाई.
December 28, 2006 at 10:05 pm
@ Pehchan Kaun,
आजकल सबसे ज्यादा स्माईलगिरी तो गुरु उड़नस्वामी के चेले कविराज जोशी कर रिये हैं। लगता तो है कि तुम वईच हो।
@ समीर लाल,
थैंक्यू है जी, पर स्माईलगिरी भी देख के करना मांगता है, एक बार अमित भाई से लोचा हो गया था इस्सी बात पे।
December 29, 2006 at 9:46 am
December 29, 2006 at 10:54 am
बहुत दिनों के बाद नारद पर हिंदी चिट्ठे देखने को आया तो आप का श्रीमुख और श्रीनाम देखने को मिला, नहीं तो हम आपको ईस्वामी के नाम के पीछे छिपा कोई गँजा सा, टीका लगाया पंडित जी दिखने वाला ही सोचते रहते! यह पर्दा हटाने का निर्णय बहुत अच्छा लिया!
December 29, 2006 at 11:08 am
@ Pehchan Kaun,
आजकल सबसे ज्यादा स्माईलगिरी तो गुरु उड़नस्वामी के चेले कविराज जोशी कर रिये हैं। लगता तो है कि तुम वईच हो।
मान गये गुरू!!! मगर कैसे पहचाना भाई?
December 29, 2006 at 11:24 am
मैने WLW का इस्तेमाल करके पहली बार कल पोस्ट किया है, उससे संबंधित कुछ प्रश्न –
1. श्रेणिगत पोस्ट कैसे करें? जैसे मैने इसका उपयोग करते हुए कल जो पहली पोस्ट की थी उसे अन्य श्रेणी में रखा था मगर वो कविताएँ श्रेणी में दिख रही है.
2. जब इसे इंस्टाल किया था तो इसने ब्लॉग का पता, प्रयोक्ता की पहचान और कूट शब्द इत्यादि गोपनिय जानकारियाँ माँगी थी, क्या यह सुरक्षित है?
3. जिस कम्प्यूटर में मैने इंस्टाल किया है, उस पर कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति WLW का प्रयोग कर मेरे ब्लॉग पर पोस्ट कर सकता है, ऐसे में क्या किया जाये?
4. यदि कोई एक से ज्यादा ब्लॉग पर लिखता हो तो WLW का उपयोग करते हुए उन्हें कैसे मैनेज किया जाये? मसलन कौनसी पोस्ट किस ब्लॉग पर करनी है.
December 29, 2006 at 1:20 pm
देखो भाई लोगों, ऐसे होते हैं मास्साब, इतनी सारा पढा्यी करा दी और वह भी बगैर डाँट -डपट के। वैसे मुझे इसके पहले
के अलावा और कोई स्माईली याद कभी भी याद नहीं रही। दो दिन पहले जब परिचर्चा मे अमित को गुस्से मे देखा तो गुस्से की स्माईली ढूंढता रहा , देखता हूँ कि यह फ़ायर फ़ाक्स वाली स्माइली काम करती है कि नहीं , पेश है अमित का गुस्सा -( अमित भाई, बुरा न मानन)
December 29, 2006 at 1:21 pm
लो भाई , यहाँ तो कुछ भी काम नहीं आया।
December 29, 2006 at 3:07 pm
@ सुनील,
मैंने पर्दा न लगाया और न ही हटाया जी, मैंने तो फोटू पहले ही लगा रखी थी। अन्तर्यामी नारद जी ने स्वयं दिव्य-दृष्टि से देख ली।
@ गिरिराज जोशी,
पहचानते कैसे नहीं पंडित जो ठहरे।
बाकी WLW संबंधी आपके सभी सवालों का जवाब देने के लिए अगली कक्षा तक इंतजार करिए जो इसी विषय पर लगने वाली है।प्रयोगशाला में काम जोरों पर चल रहा है। शायद तीन-चार दिन में कक्षा लग जाए। कृपया धीरज रखें और प्रतीक्षा करें।
@ PRABHAT TANDON,
प्रभात जी, टिप्पणी में IMG टैग काम नहीं करता, इसमें आम स्माईलियों से ही काम चलाना पड़ेगा। खैर कोई बात नहीं वो भी काफी हैं।
January 1, 2007 at 6:14 pm
[...] श्रीशजी बोले तो अपने ई-पंडितजी की क्लास में ज्ञानार्जन करने के बाद विचार आया कि विंडो लाईव राईटर कब का डाऊनलोड किया हुआ डाऊनलोड फोल्डर में पड़ा है, क्यों ना अब इसे इंस्टाल कर ही लिया जाये. [...]
January 13, 2007 at 4:23 pm
वाह भाई । क्या स्माइल है ।