यद्यपि हो सकता है गंणितीय रुप से यह मुर्खतापूर्ण लगे लेकिन Equation ‘expand‘ करने का यह एकदम सही तरीका है।

How to expand an Equation, originally uploaded by imShrish.

पत्नी (पति से) – अजी सुनते हो, हमारी पड़ोसन आज बाजार से चार साडि़यां लेकर आई।
पति (पत्नी से) – तो क्या हुआ, कल तुम बाजार से आठ साडि़यां लेकर आना।
पत्नी सच।
पति सबको दिखाकर परसों वापस कर देना। साड़ी की दुकान वाला मेरा मित्र है, एक दिन के लिए साडि़यां घर लाने पर एतराज नहीं करेगा।

घुग्घू सामान्य ज्ञान मैं किम्मे घणाए कमजोर था। एक दिन वो इंटरव्यू देण जावै था। राह मैं उसती रलदू मिल ग्या। वो बोल्या – घुग्घू किम्मे परेशान दिक्खै सै। घुग्घू बोल्या – हां भाई इंटरव्यू देण जाण लाग रह्या सूं ज्यांतै परेशान सूं। रलदू बोल्या – इसमैं परेशान होण की के बात सै। इंटरव्यू आला किम्मे बी पूच्छै तो चुप ना बैठिये किम्मे नै किम्मे जवाब जरूर दिए। इंटरव्यू मैं घुग्घू तै अफसर बोल्या – आपणे देश म्ह कपड़ा कड़ै बणै सै। घुग्घू सोच-साच के बोल्या – जी कारखान्यां म्ह

Wanted :: श्रीहरि

नवम्बर 26, 2006

इस चितचोर की लाखों लोगों को तलाश है, क्या आपमें से किसी ने इसे देखा है ? यदि हाँ तो कृपया बताइए ?

Wanted Sri Hari, originally uploaded by imShrish.

यह चित्र इस्कॉन की साइट कृष्णा.कॉम पर देखा था। चित्र की थीम बहुत पसंद आई। आपका क्या विचार है।

जब से हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रवेश किया है अक्सर चिट्ठाकार बंधु मेरे नाम की वर्तनी गलत लिख देते हैं जैसे ‘शिरिष‘, शिरीष‘, ‘शिरिश‘, शीरीश‘, ‘श्रिश‘, ‘श्रीरीश‘ आदि जो कि ‘श्रीश’ होना चाहिए। उपरोक्त लोगों की गलती नहीं है, मेरा नाम ही जरा विशेष प्रकार का है। इसलिए मैं आपको इसकी वर्तनी तथा अर्थ बताता हूँ।

‘श्रीश’ शब्द का अर्थ:

‘श्रीश’ शब्द का संधिविच्छेद है – ‘श्री:+ईश’‘श्री’ माने लक्ष्मी और ‘ईश’ माने ‘स्वामी या पति’ अर्थात ‘भगवान विष्णु’। यह नाम मेरे पिताजी ने रखा था जो संस्कृत के प्रवक्ता हैं। मेरे जन्म-नक्षत्र के हिसाब से नाम ‘स’ अक्षर से बनता था अत: उन्होंने ‘श्री विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्र’ के निम्न श्लोक से नाम चुना।

श्रीदः श्रीश: श्रीनिवास: श्रीनिधि: श्रीविभावनः । श्रीधरः श्रीकरः श्रेयः श्रीमाँल्लोकत्रयाश्रयः ॥७८॥

‘श्रीश’ तथा ‘शिरीष’ में भ्रमित न हों, ‘शिरीष’ एक पुष्प का नाम है। मेरे नाम को लिखने तथा बोलने में हमेशा से ही लोगों को जरा भ्रम रहा है। पर इसी नाम के कारण ही मेरी अक्सर पहचान बन जाती है। बचपन में लगता था कि पिताजी ने कैसा कठिन नाम रखा पर अब समझ आता है कि यह एक श्रेष्ठ नाम है।

‘श्रीश’ लिखा कैसे जाए:

‘श्रीमान’ वाला ‘श्री’ तथा ‘शलगम’ वाला ‘श’ लेकर ‘श्रीश’ बनता है।

BarahaIME तथा HindiWriter में कुँजियाँ दबाइए: shrIsha

Hindi Indic IME में कुँजियाँ दबाइए: shreesha

आशा है अब सभी चिट्ठाकार बंधु मेरा नाम लिखने में कठिनाई नहीं महसूस करेंगें। अब तक आप लोग तसल्ली पूर्वक बोर हो चुके होंगें इसलिए लीजिए नाम संबंधी यह चुटकुला सुनिए।

मूल चुटकुला (संस्कृत में):

मम नाम …..

जेम्स् बाण्ड् हैदराबादनगरम् आगतवान् । तस्य निरीक्षायामेव आसीत् क्श्चन कारयानचालक: । यानं प्रस्थितम् । बाण्ड् स्वशैल्या परिचयम् आरब्धवान् – ‘अहं बाण्ड् … जेम्स् बाण्ड् । भवान् ?’

चालकः अवदत् – ‘अहं सायी । शिववेङ्कटसायी । लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी । श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी । सीतारामञ्जनेयुलु राजशेखर-श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायण …….’

बाण्ड् गच्छतः यानात् कूर्दनं कृत्वा अधावत् ।

सम्भाषण – सन्देशः मार्च २००६ से साभार

हिन्दी अनुवाद:

मेरा नाम …..

एक बार जेम्स बॉण्ड हैदराबादनगर में आया। वहाँ उसकी देखरेख में कोई कार्य संपन्न होना था। वह एक कार में बैठकर चल पड़ा। बॉण्ड अपनी शैली (स्टाइल) में परिचय देने लगा – मैं बॉण्ड … जेम्स बॉण्ड। आप ?

चालक (ड्राइवर) बोला – मैं सायी। शिववेङ्कटसायी। लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी। श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी। सीतारामञ्जनेयुलु राजशेखर-श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायण …….

बॉण्ड चलती हुई कार से कूदकर भाग गया।

रलदू नै चोरी करण की कसूती आदत थी। एक दिन वो चोरी करदा पकड़या ग्या। थाणेदार सिपाही से बोल्या – इसकै सौ जूत मार आप्पे सीधा हो जेगा। सिपाही उसती हवालात म्ह जूत मारण खातर लेग्या तो रलदू उसती सौ का नोट दिखाकै बोल्या – किम्मे हो नी सकदा। सिपाही सौ का नोट गोज म्ह घाल कै बोल्या – मैं कांध कै जूत मारूँगा अर तूँ किलकी मारै जाइये। रलदू नै एक सौ का नोट और जेब तै काढ्या अर बोल्या – लै किलकी बी तूँ ए मार दिए मन्नै जाण दे

नत्थू नै आंख्यां तै कम दिख्या करदा। एक दिन वो शहर म्ह तै तीन चश्मे बणवा के लियाआ। उसका छोरा बोल्या – बाबू इतणे चश्में क्यांतै बणवा के ल्याआ सै। नत्थू बोल्या – एक तो दूर की चीज देखण का सै अर एक धौरे की चीज देखण का सै। उसका छोरा पूछण लाग्या – अर यो तीसरा। नत्थू बोल्या – यो नूं देखण का सै अक कोणसा चश्मा दूर का सै, अर कोणसा चश्मा नजदीक का सै