हरियाणवी मखौल – किलकी मार दिए

नवम्बर 24, 2006

रलदू नै चोरी करण की कसूती आदत थी। एक दिन वो चोरी करदा पकड़या ग्या। थाणेदार सिपाही से बोल्या – इसकै सौ जूत मार आप्पे सीधा हो जेगा। सिपाही उसती हवालात म्ह जूत मारण खातर लेग्या तो रलदू उसती सौ का नोट दिखाकै बोल्या – किम्मे हो नी सकदा। सिपाही सौ का नोट गोज म्ह घाल कै बोल्या – मैं कांध कै जूत मारूँगा अर तूँ किलकी मारै जाइये। रलदू नै एक सौ का नोट और जेब तै काढ्या अर बोल्या – लै किलकी बी तूँ ए मार दिए मन्नै जाण दे

9 Responses to “हरियाणवी मखौल – किलकी मार दिए”


  1. हा हा हा.
    हरयाणवी बन्ने का भी जवाब नहीं.
    बहुत अच्छे.

  2. Shrish Says:

    मेहरबानी भाईयों, न्यू ए मेरा औंसला बडान्दे रओ अर मैं और भी ‘मखौल’ पोस्ट करदा जऊंगा।

  3. koçluk Says:

    That is very neccessary information about these subjects. I have found with googling you and i think that you are number one about these. Thanks a lot.

    saç ekimi
    saç ekimi


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