एक पागल को जेल हो गई। उसने अपना हाथ काटकर जेल से बाहर फैंक दिया।

किसी ने पूछा : यह क्या कर रहे हो ?

पागल ने कहा : मैं किश्तों में बाहर चला जाऊँगा।

दो बेवकूफ लड़के आपस में बातें कर रहे थे।

पहला : मेरे पिताजी अभी तक यह तय नहीं कर पाये हैं कि वे गाय खरीदें या ट्रैक्टर ?

दूसरा : गाय पर सवारी करते हुए तो वे बेवकूफ लगेंगे।

पहला : लेकिन ट्रैक्टर से दूध दुहते हुए समय तो वे और ज्यादा बेवकूफ लगेंगे।

Bruce Lee

ब्रूस ली की फिल्में बचपन में सभी ने देखी होंगी और मेरी तरह पसंद भी करते होंगे लेकिन क्या आपको पता है कि ब्रूस ली हिंदुस्तानी था, यकीन नहीं आया तो ये पढि़ए:

  • ब्रूस ली की पसंदीदा सब्जीMu Lee
  • ब्रूस ली खाना किसमें खाता थाTha Lee
  • थियेटर में क्या होता है जब ब्रूस ली की फिल्म खत्म होती हैKha Lee
  • ब्रूस ली की सिस्टर-इन-लॉ का नामSaa Lee
  • ब्रूस ली का पसंदीदा नाश्ताId Lee
  • ब्रूस ली का पसंदीदा त्यौहार Diwa Lee
  • ब्रूस ली की पसंदीदा अभनेत्रीSona lee
  • ब्रूस ली का पसंदीदा संगीतQawa lee
  • ब्रूस ली अक्सर कौन सा काम करता थाCoo Lee
  • ब्रूस ली कब मराFinal Lee
  • ब्रूस ली कैसे मराwith a Go Lee
  • ब्रूस ली का पसंदीदा हिल स्टेशनKulu Mana Lee
  • ब्रूस ली का निकनेमMawa Lee
  • ब्रूस ली की पसंदीदा हिन्दी फिल्मGharwa LEE Baharwa LEE
  • ब्रूस ली का पसंदीदा क्रिकेटरSaurav Gangu Lee

तो भाई लोग क्या बोलते हो था ब्रूस ली हिन्दुस्तानी या नहीं ?

अगर तुम सोच रहे हो कि मुझे ये सब कैसे पता तो सुनो पिछले जन्म में Bruce Lee मेरा भाई था, मेरा नाम था – Shrish LEE

संबंधित कड़ियाँ:

IMDb पर ब्रूस ली
विकीपीडिया पर ब्रूस ली
फ्लिकर पर ब्रूस ली की कुछ चुनिंदा फोटो

आज एक स्माईली मेरेको मिलने कू आया। मैं बोला कईसा है रे तो बोला क्या बताऊं जी बोत टेन्शन में हूँ। मैंने कहा कायकू भाई आजकल तो तू बोत हिट होरेला है जिसको देखो वई स्माईलगिरी कर रेला है। बोला यई तो लोचा है बाप जबसे वो उड़नस्वामी ने लोगों को अन्यथा नई लेने को बोला है मेरी तो वाट लग गई है। मैं बोला अबे तू तो पोपुलर हो गया यार मैं तो बोलता हूँ आज लास्ट दिन है तू भी चिट्ठा लिखना शुरु कर और चुनाव में खडा़ हो जा। बोला खालीपीली कायकू लेरे ओ बाप, वर्क-लोड एकदम बढ़ गया है, भाई लोग मेरे को सांस नी लेने देरे खासकर टिप्पणियों में। कोई उपाय बताओ ना पंडित जी। मैं बोला ठीक है भाई अपुन ट्राई करता है आगे भाई लोगों की मर्जी। तो भाई लोग आज की क्लास में अपुन बताएगा कि स्माईलगिरी कैसे करने का है।

स्माईलियों का इतिहास भूगोल बताकर बोर नहीं करुंगा जिन को जानना हो नीचे दी गई कड़ियों पर जाएं। स्माईली दो प्रकार के होते हैं – टेक्स्ट तथा ग्राफिक। मैं यहाँ सिर्फ ग्राफिक स्माईली दे रहा हूँ (बिना Quotes के प्रयोग करें)। मेरे विचार से ब्लॉगर ग्राफिक स्माईली नहीं दिखा सकता।

🙂 =”:)” या “:-)” या “:smile:”
😀 = “:D” या “:-D” या “:grin:”
😦 = “:(” या “:-(” या “:sad:”
😮 = “:o” या “:-o” या “:eek:”
😯 = “8O” या “8-O” या “:shock:”
😕 = “:?” या “:-?” या “:???:”
8) = “8)” या “8-)” या “:cool:”
😡 = “:x” या “:-x” या “:mad:”
😛 = “:P” या “:-P” या “:razz:”
😐 = “:|” या “:-|” या “:neutral:”
😉 = “;)” या “;-)” या “:wink:”
😆 = “:lol:”
😳 = “:oops:”
😥 = “:cry:”
👿 = “:evil:”
😈 = “:twisted:”
🙄 = “:roll:”
❗ = “:!:”
❓ = “:?:”
💡 = “:idea:”
➡ = “:arrow:”
:mrgreen: = “:mrgreen:”

फोरमों के मामले में कुछ स्माईली सभी फोरमों के लिए काम नहीं करते। परिचर्चा के लिए स्माईली कोड यहाँ पर दिए गए हैं।

फायरफॉक्स में स्माईली ही स्माईली:

फायरफॉक्स के लिए Smiley Xtra नामक एक्सटेंशन यहाँ से डाउनलोड तथा इंस्टाल करें। इससे Smiley Xtra का आइकॉन फायरफॉक्स के टूलबार पर आ जाएगा।

इस पर क्लिक करने से यह साइडबार में खुल जाएगा।

चिट्ठे पर स्माईली लगाने के लिए HTML एडीटर में जाकर Smiley Xtra के साइडबार में बायें से चौथा आइकॉन तथा परिचर्चा आदि फोरम के लिए पोस्ट एडीटर में जाकर बायें से तीसरा आइकॉन क्लिक करें। इससे क्रमशः HTML तथा BBCode इन्सर्ट हो जाएगा।

विंडोज लाइव राइटर में Spaces Emoticon:

विंडोज लाइव राइटर के लिए Insert Spaces Emoticon प्लग‍इन यहाँ से डाउनलोड तथा इंस्टाल करें। अब WLW में Insert मीनू में जाकर A Spaces Emoticon… पर क्लिक करें।

जिससे नीचे वाली विंडो खुल जाएगी।

बस अपनी पसंद का स्माईली चुनिए और OK क्लिक करिए।

तो भाईलोग स्माईलगिरी करो बिंदास होके। Celebrating

संबंधित कडियाँ:

Smiley के बारे में विकीपीडिया पर
Emoticon के बारे में विकीपीडिया पर
Using Smilies « WordPress Codex

क्या आपको पता है कि आज शहीद उधम सिंह कि जयन्ती है। कोई बात नहीं अगर नहीं भी पता तो जब कहीं इस बारे में बात ही नहीं होती तो कहाँ से पता चले। सब अखबार वालों ने एक पैराग्राफ में इस खबर को निपटा दिया वो भी बिल्कुल अंदर के पृष्टों पर। टीवी वालों की तो बात ही छोड़िए। न ही किसी राजनीतिक दल ने उनको याद किया। पता है क्यों क्योंकि वे आज बिकते नहीं गांधी बिकते हैं। क्योंकि उन्होंने और अन्य शहीदों ने देश को आजाद थोड़े ही न कराया वो तो सिर्फ गांधी ने कराया। कुछ दिन पहले चली थी यह बहस काफी देश में भी और हमारे चिट्ठाजगत में भी। क्या गलत बोले थे रामदेव बाबा। राजनीतिक द्लों ने उन्हें क्यों याद न किया क्योंकि वे कांग्रेस आदि दल में जो न थे। कौन कहता है ये शहीद महान थे, उन्होंने कुर्बानी दी सब झूठ है कुर्बानी तो बस उन्होंने दी न जिनके नाम के पीछे गांधी या नेहरु लगा था। बाघा जतिन को कोई जानता है आज, ये गांधी के आने से बहुत पहले ही एक समय भारत के सबसे प्रसिद्ध नेता थे आज किसी बच्चे को मालूम है लाला हरदयाल कौन थे। वीर सावरकर क्यों हाशिए पर ला दिए गए क्योंकि उनका कसूर मात्र इतना था कि वे हिंदूवादी थे सिर्फ इस गुनाह के कारण उनका सब बलिदान भुला दिया गया। ये सब कैसे हुआ ? आजादी से पहले कांग्रेस का ने इन सब शहीदों का विरोध किया उन्हें आतंकवादी कहा, नेताजी को अपने रास्ते से हटवाया और और आजादी के बाद एक योजना के तहत नई पीढ़ी को उनके बारे में न पढ़ाया जाए न बताया जाए, ऐसा प्रबंध किया जिससे नई पीढ़ी को केवल यह पता हो कि देश को आजाद कराया सिर्फ गांधी और नेहरू ने। क्योंकि ये लोग कांग्रेस से जुडे थे और इनके नाम पे हमेशा हमें वोट मिलता रहे। आज फैशन है कि गांधीवाद का, गांधीगिरी का भगवान को गाली दो लेकिन गांधी की जरा भी आलोचना न करो। अब आप कहेंगे कि इसमें गांधी का क्या कसूर है, है कसूर लेकिन उसकी बात कभी बाद में अलग से करुँगा। हमें पढ़ाया जाता है, बताया जाता है यही सब। गांधी जी ने अफ्रीका से आने के बाद अंग्रेजों की कभी एक लाठी भी न खाई। इन शहीदों ने क्या तप किया, क्यों वे इन गांधी और गांधीभक्तों से भिन्न थे जानना है तो कभी उनकी जीवनियाँ पढ़ो। लेकिन कौन पढ़े लोग कौन सा इनको याद करते हैं उन्हें तो आज मुन्नाभाई की गांधीगिरी देखनी है वो मुन्नाभाई जिस पर ड्र्ग्स, अवैध हथियार तथा लाखों लोगों के कत्ल में शामिल होने के आरोप हैं। किए जाओ भाई गांधीगिरी। महान है ये गांधीगिरी।

क्रांतिवीर उधम सिंह का जन्म पंजाब-प्रांत के ग्राम सुनाम (जनपद – संगरुर) में २६ दिसंबर १८९९ को हुआ था। इनके पिता का नाम टहल सिंह था। वर्ष १९१९ का जलियांवाला बाग का जघन्य नरसंहार उन्होंने अपनी आँखों से देखा था। उन्होंने देखा था कि कुछ ही क्षणों में जलियांवाला बाग खून में नहा गया और असहाय निहत्थे लोगों पर अंग्रेजी शासन का बर्बर अत्याचार और लाशों का अंबार। उन्होंने इसी दिन इस नरसंहार के नायक जनरल डायर से बदला लेने की प्रतिज्ञा की थी। प्रतिशोध की आग में जलते हुए यह नर-पुंगव दक्षिण-अफ्रीका तथा अमरीका होते हुए वर्ष १९२३ में इंग्लैंड पहुँचा। वर्ष १९२८ में भगतसिंह के बुलाने पर उन्हें भारत आना पड़ा। १९३३ में वह पुनः लंदन पहुँचे। तब तक जनरल डायर मर चुका था, किंतु उसके अपराध पर मोहर लगाने वाला सर माइकल-ओ-डायर तथा लॉर्ड जेटलैंड अभी जीवित था।

१३ मार्च १९४० को उन्हें अपने हृदय की धधकती आग को शांत करने का मौका मिला। उस दिन लंदन की एक गोष्ठी में दोनों अपराधी उपस्थित थे। उधमसिंह धीरे-धीरे चुपके से जाकर मंच से कुछ दूरी पर बैठ गए। सर माइकल-ओ-डायर जैसे ही भारत के विरुद्ध उत्तेजक भाषण देने के पश्चात मुड़े, उधमसिंह ने उस पर गोली दाग दी। वह वहीं ढेर हो गया। लॉर्ड जेटलैंड भी बुरी तरह घायल हो गया। सभा में भगदड़ मच गई पर उधमसिंह भागे नहीं। वह दृढ़ता से खड़े रहे और सीना तानकर कहा – “माइकल को मैंने मारा है।” मुकदमा चलने पर अदालत में अपना बयान देते हुए उन्होंने सपष्ट कहा था – “यह काम मैंने किया माइकल असली अपराधी था। उसके साथ ऐसा ही किया जाना चाहिए था। वह मेरे देश की आत्मा को कुचल देना चाहता था। मैंने उसे कुचल दिया। पुरे २१ साल तक मैं बदले की आग में जलता रहा। मुझे खुशी है कि मैंने यह काम पूरा किया। मैं अपने देश के लिए मर रहा हूँ। मेरा इससे बड़ा और कया सम्मान हो सकता है कि मैं मातृभूमि के लिए मरुँ।” इस प्रकार उस मृत्युंजयी बलिदानी ने मातृभूमि के चरणों में हँसते-हँसते अपने प्राणों की भेंट चढ़ा दी। उनका बलिदान हमें देशभक्ति व राष्ट्रीय एकता की भावना की प्रेरणा देता रहेगा।

आज जिस लोक में वे हों क्या उन देशभक्तों को उनकी उपेक्षा पर दुख हो रहा होगा ? बिल्कुल नहीं क्योंकि उनका जीवन गीता के निष्काम कर्म का जीवंत उदाहरण था। उनकी खासियत ही यही थी कि उन्हें बस सरफरोशी की तमन्ना थी बदले में कुछ चाहते होते तो कांग्रेसियों की तरह धरने-सत्याग्रह करते और नेता बनते।

आओ कम से कम हम लोग मिलकर उस शहीद को अपनी श्रद्दांजली दें। हे अमर शहीद हुतात्मा उधम-सिंह तुम्हे जन्मदिन मुबारक ! शत-शत नमन तुम्हारी शहादत को !

संबंधित कड़ियाँ:

विकीपीडिया पर उधम-सिंह पर लेख
दैनिक जागरण में शहीद उधम-सिंह का संक्षिप्त परिचय
Udham Singh – A short biographical sketch

लो जी हम बेकार ही रश्क़ कर रहे थे कि क़ाश पीटर हमारी पाठशाला में होता। अभी मालूम पड़ा पीटर जैसे कई ‘मेधावी’ छात्र मेरे चेले हैं। आजकल हरियाणा के विद्यालयों में प्री-बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। अब इस बार से हमारे शिक्षा बोर्ड ने सेमेस्टर प्रणाली लागू की है। प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं अभी सितम्बर में हुई थीं जिस कारण द्वितीय सेमेस्टर का सिलेबस अभी पूरा नहीं हो पाया। लेकिन इन प्री-बोर्ड परीक्षाओं में पूरा ही सिलेबस आना था तो जो सिलेबस अभी नहीं हुआ था उसके प्रश्न बच्चों ने अपनी बुद्धि से दिए। उनकी ‘इनोवेटिव थिंकिंग’ देखकर एक ही बात समझ आती है – ‘यथा गुरु तथा चेला’। लीजिए आप भी कुछ नमूने देखिए। मेरे पास स्कैनर नहीं है इसलिए टाइप कर के पोस्ट कर रहा हूँ वरना ज्यादा अच्छा रहता।

प्रश्न: जनन किसे कहते हैं ? जनसंख्या वृद्धि रोकने के कुछ उपायों का वर्णन करो।

उतर: बच्चे पैदा होने को जनन कहते हैं। लड़का पैदा होने को लोग अच्छा समझते हैं पर ये ठीक बात नहीं है। ज्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए, इससे बेरोजगारी बढ़ती है जिससे कई लोग तो भूखे सोते हैं। जनसंख्या रोकने के लिए कुछ उपाय निम्न हैं:

  • हमें जनसंख्या पर रोक लगानी चाहिए।
  • हमें लोगों को उत्साहित करना चाहिए कि वे ज्यादा बच्चे पैदा ना करें।
  • एक या दो बच्चों से अधिक बच्चे ना करें।
  • शादी से पहले बच्चे नहीं करने चाहिए।
  • बच्चों को भी ये बात समझानी चाहिए कि वो भी ज्यादा बच्चे पैदा ना करें।
  • आजकल लोगों को महंगाई में तो बच्चे देख के पैदा करने चाहिए।

(काश ये उपाय भारत सरकार को पता होते तो आज इतनी जनसंख्या न होती)

प्रश्न: रंगीन काँच किस प्रकार बनाया जाता है ?

उतर: रंगीन काँच बनाने के लिए काँच को पिघलाकर उसमें अनेक प्रकार के रंग मिलाकर रंगीन काँच बनाया जाता है।
(इटस सो सिम्पल यार) 😉

प्रश्न: वायु में सीसे के क्या स्त्रोत हैं ? इससे क्या हानियाँ हो सकती हैं ?

उतर: जब कहीं काँच आदि टूट जाए तो वायु में सीसे कण फैल जाते हैं। ये बहुत बारीक होते हैं जो सांस के साथ अंदर चले जाते हैं। जिसके ऊपर गिर जाए उसका तो बीमार होना निश्चित है। इससे आदमी मर भी सकता है।
(हे भगवान मुझे पता नहीं था आगे से सावधान रहूँगा)

प्रश्न: विद्युत-धारा से क्या तात्पर्य है ? इसके उपयोग लिखो।

उतर: बिजली की तार में जो होता है उसको विद्युत-धारा बोलते हैं। इसको छूने से करंट लगता है। इससे सब बिजली की चीजें चलती हैं जैसे पँखा, बल्ब, टीवी आदि। छोटे बच्चों को इससे दूर रखना चाहिए। करंट लगने से मौत भी हो सकती है।
(एकदम सही फरमाया है न)

प्रश्न: खेत की तैयारी किसे कहते हैं ? इसके क्या लाभ हैं ?

उतर: खेत में फसल उगाने के लिए जो भी काम करते हैं उसे खेत की तैयारी कहते हैं। खेत में उगाई गई फसल को काटने के बाद हमें खेत को खाली छोड़ देना चाहिए। अगर उसमें एक ही बीज बो‍ओगे तो हमारे खेत की मिट्टी मर जाएगी। इसलिए हमें आए साल उसमें दाल, गन्ना, आलू जैसे कई प्रकार के फसल लगानी चाहिए। खाद भी गेरनी चाहिए इससे खेत में जान आती है।

(गांव का बच्चा था अपना पूरा ज्ञान बांट दिया) 🙂

प्रश्न: कोक के दो उपयोग लिखो।

उतर: कोक के निम्नलिखित उपयोग हैं:

  • माँ अपनी कोक से बच्चे को जन्म देती है।
  • और उसे दूध भी पिलाती है।
  • दुकानदार इसको आइसक्रीम और केक में डालते हैं।
  • कोक का उपयोग कोका-कोला में भी होता है।

(रामदेव बाबा को जाकर बताओ भाई कोई, नाहक कोक को बदनाम करते हैं) 🙂

अब आप ही बताओ भाई, सब कुछ तो ‘सही’ लिखा है। कुछ गलत लिखा हो तो बोलो। हम नंबर दें या न दें ?Thinking 2


मैं जानना चाहता हूँ कि सर्वज्ञ के लिए ऊपर वाला एंटीपिक्सल बटन किसने बनाया। मैं काफी दिनों से कोई हिन्दी एंटीपिक्सल बटन मेकर ढ़ूढ रहा हूँ जो हिन्दी टेक्स्ट में बटन बना सके। मैंने कई सेवाएं आजमा कर देख ली पर परिणाम शून्य।

अब इस बटन के बारे में दो ही संभावनाएं हैं:

  1. यह किसी Online Button Maker द्वारा बनाया गया है जैसे यह साइट। ऐसे बटन मेकर ज्यादातर PHP Script का उपयोग करते हैं।
  2. यह बटन किसी चित्र-संपादन सॉफ्टवेयर जैसे कि – फोटोशॉप, पेंटशॉप प्रो या जिम्प आदि में बनाया गया है।

अब हम से ही किसी न किसी ने ही यह इसे बनाया होगा कोई पाताल से आकर तो बना नहीं गया और होगा भी यह किसी वरिष्ठ चिट्ठाकार यथा आलोक, पंकज नरुला, देवाशीष चक्रवर्ती, रमण कौल अथवा जीतेन्द्र चौधरी आदि का ही काम।

मैं इस प्रश्न का उतर जानने के लिए बहुत उत्सुक हूँ, यह प्रश्न मैं परिचर्चा में भी पूछ चुका हूँ पर पता नहीं चल पाया। यदि आपमें से कोई भी इस बारे में कोई जानकारी दे सकता हो तो बताइए।

पहली बात तो यह जानना चाहता हूँ कि यह किसी ऑनलाइन टूल द्वारा बनाया गया या ग्राफिक्स प्रोग्राम द्वारा, दूसरा उसका नाम तथा तीसरा यह कि किस फॉन्ट (रेमिंगटन अथवा यूनीकोड) के प्रयोग द्वारा।

वरिष्ठ भाईयों शीघ्र उतर दो वरना एक-एक को मेल कर पूछँगा। 🙂

P.S: एंटीपिक्सल बटन 80×15 आकार का वह बटन होता है जो इंटरनेट खासकर ब्लॉग्स पर बहुत लोकप्रिय है। हिन्दी ब्लॉगजगत में यह अभी ज्यादा प्रचलित नहीं हुआ पर इंग्लिश ब्लॉगजगत में यह हर तीसरे ब्लॉग पर दिखाई देते हैं। अधिक जानकारी के लिए यहाँ विकिपीडिया पर देखिए