गिरिराज भाई को हँसाना है – पंडित जी, कविराज और डाकू

जनवरी 5, 2007

सुना है कि गिरिराज भाई आजकल दुखी टाइप हो रहे हैं और इसी हालत में वो अजीब-अजीब दार्शनिक बातें कर रहे हैं। नहीं-नहीं सरकार कविता लिखने पर प्रतिबंध नहीं लगाने जा रही। इसका कारण फुरसतिया भाईसाहब बता रहे हैं। तो फिर गिरिराज भाई नालायक मन को कोसने में लगे हैं। अब हमारा फर्ज बनता है कि ऐसे मैं हम ऑपरेशन गिरिराज भाई को हँसाना है चलाएं। इसी श्रृखंला की पहली कड़ी में मैं आपको एक पुरानी घटना सुनाता हूँ। इस श्रृँखला को कोई भी आगे बढ़ा सकता है। (सागर भाई सुन रहे हैं ना)

एक बार पंडित जी और कविराज बातें कर रहे थे। पंडित जी – अरे यार पता है एक बार मैं जब घनघोर जंगल से जा रहा था तो मुझे डाकुओं ने घेर लिया और मेरी घडी़, चेन, बटुआ सब लूट लिया। कविराज – लेकिन आपके पास पिस्तौल भी तो थी। पंडित जी – हाँ लेकिन शुक्र है उस पर उनकी नजर नहीं पड़ी

कविराज – अब मेरी सुनो, एक बार मुझे भी रामगढ़ गाँव में डाकुओं ने घेर लिया। डाकुओं का सरदार गब्बर सिंह बोला – यहाँ से ५ मील…, जो कुछ है हमारे हवाले कर दो। कविराज – तुम मुझे जानते नहीं। गब्बर सिंह – कौन हो तुम। कविराज – यहाँ से १० मील दूर किसी गाँव में जब भी कोई बच्चा रोता है तो माँ कहती है बेटा सो जा, सो जा नहीं तो कविराज आ जाएगा। अब तुम यहाँ से खिसकते हो या कविता सुनानी शुरु करुँ…

कहते हैं डाकू गब्बर सिंह दुबारा रामगढ़ में नहीं दिखाई दिया। Giggle

9 Responses to “गिरिराज भाई को हँसाना है – पंडित जी, कविराज और डाकू”


  1. हा हा हो हो🙂🙂
    आशा है कविराज खुल कर हँसे होंगे….
    बहुत अच्छे, श्रीश घर्म का काम कर रहे हो…लोगो को हँसा रहे हो…लगे रहो…

  2. Tarun Says:

    हा हा इसे सुन के कविराज तो क्या सागर भाई भी हंस पडेगें..लांग टाईम बैक उन्हें भी तो हंसाना था।😉

  3. ratna Says:

    हास्य में छुपा व्यंग्य टाप का लगा।


  4. मजा नहीं आया भाई. डाकू गब्बर सिंह मेरी कविता सुने बिना ही रामगढ़ छोड़कर चला गया😦

    इसे ऐसे लिखना चाहिए था –

    कविराज – अब मेरी सुनो, एक बार मुझे भी रामगढ़ गाँव में डाकुओं ने घेर लिया।

    डाकुओं का सरदार गब्बर सिंह बोला – जो कुछ है हमारे हवाले कर दो।

    कविराज –

    हे गब्बर सिंह, हम कृतार्थ हुए
    अब तुम भी हमरे श्रोता हुए
    मैं आपका दिल बहलाऊँगा
    काव्य-रस से नहलाऊँगा

    ये चाकू, कटार, पिस्टल, दूनाली
    क्या इनमें ही उलझे रहोगे?
    शत्रु पर विजय को नवशस्त्रों का
    क्या अभ्यास नहीं करोगे?

    दोहा, रोला, मात्रा, क़ुण्डली
    ग़ज़ल, व्यंज़ल, शेर, मुण्डली
    लो ये नये हथियार उठाओ
    चाहे जिसे शिकार बनाओं

    इनका निशाना भी अचूक है
    निर्भय होकर कर दो चढ़ाई
    जिस पर भी चलाना हो तुमको
    बस इनसे तुम कर दो बढ़ाई

    अर्द्धचेतन-नृत्य* करवाते रहो, जब तक
    ना करे मातृ-चरण-वंदन* बेचारा
    फिर भी गर ना चुमे-चरण
    दिखा दो कष्ट-निवारक-गलियारा*

    —–
    * -> इनके अर्थ यहाँ हैं http://www.girionline.com/blog/?p=161


  5. Giriraaj ji kabhi AKELA ho jate hai to kabhi Kaviraj kaa chogaa dhaaran kar khud ko “laayak” kahalaane ke liye naa naa karate hai.

    MP UP ki sard mizaz havaa ke chalate man to thodaa udaas ho hi jata hai. Giriraj jo kavi raj bhi hai akele hi sabko hansaate rahate hai. prasann rahanaa aur auron ko prasann karanaa hum log to inhee se seekhate hai.

    He Hansi ke Gabbar Sing.h.. Hansi ke Gubbare sing karate raho…


  6. सागर भाई कुछ ऊँचा सुनते हैं और देर से भी सो आपकी बात हम समझ रहे हैं और कोशिश करते हैं कि आपके इस महान कार्य को हम आगे बढ़ायें।
    बेचारा गब्बर😦

    • raja Says:

      मेरा नम है सीमा ओर मैन 19 साल कि हून घर मैन ओर मेरे पपा हि हैन, जो कि 40 सल क हैन ।ये कहनि नहि हकिकत है जो आज से 2 महिने पहले हुइ ओर जिसमे मुझे बहुत मजा दिया । मेरे नै नै झनते(बल) चुत पे आने हि सुरु हुअ थे।एक दिन पपा कहिन गये हुअ तो मैने सोचा कयोन ना आअज झनते कत लि जयी मैन केनचि ले कर अपने कमरे मैन आ गयि ओर ननगि होकेर अपनि झनती कतने लगि,मुझे बहुत हि जोर कि खुजलि चल रहि थि झनते कतने क चाक्ककेर मैन कमरे का गते बनध करना हि भूल गयि मैन अपनि झनते कतने मैन मसत थि ओर चुत को खुजला रहि थि। कि तभि मैन देखा कि कोइ मेरि पयरि चुत पे हथ फेरे रहा है मैन बुरि तरह चूनकि तभि मैने देखा कि ये कोइ ओर नहि मेरे अपने पपा है मैन शरमा गयि पपा बोले अरी सुमि(सीमा)मुझको बोल दिया होता मैन तुमहरि झनती कत देता।।? ओर वो बोले चुत क बल केनचि से नहि रज़ोर से साफ़ करते है थोदि देर मैन उनहोने रज़ोर लकेर मेरि पयरि सि मुनिया का मुनदन कर दिया वो अब अभुत हि खूबसुरत लग रहि थि पपा ने झुक कर उसको चूम लिया मैन शरमा गयि।

      मैन कहा आप बहर जऊ मैन कपदे पहन लू वो बोले नहि बेता आज तुमको कुच सिखना चहता हून तुम जवन हो गयि हो ।। मैने कहा कया सिखना है वोबोले चुदै करना, मैन बोलि थिक है पपा आज हमको चुदै करना सिखिये ,पपा ने मेरि हन सुन कर मुझे बहून मैन भर लिया ओरबुरि तरह चुमने चतने लगे मेरा बदन पिघलने लगा एक अजिब सा नशा मुझ पे चाता जा रहा था ।पपा मेरि गोरि गोरि गोल गोल चुनचियोन को मसल रहे थे इतनि जोर से कि मैन चिखि आआआआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह इतनि जोर से नहि पपा आरम से मेरि सिसकिया कमरे मैन गुनज रहि थिआअह सीईईए ओव्वव्वव्वव्वव्व प्पपाआआआआप्पाआआअ कया कर रहे हो तभि पपा ने मेरि एक चुनचि कि घुनदि मुह मे दल कर सूसने लगे मैन जैसे आसमन मैन उध रहि थि दुसरि चुनचि को पपा मसल रहे थे मैन अपना होश खोति जा रहि थि मेरे हथ खुद बखुद पपा कि पैन कि ज़िप पे चले गयी वो जगह मुझे कुच सखत महसूस हुइ मैने पपा कि ज़िप खोल दलि मुजे लगा जसिए कोइ साप है मैन उचल कर कुदि। पपा बोले सुमि का हुअ मैन बोलि पपा अपकि पैनत मे साप है जलदि से पैनत निकल दो पपा ने पैनत खोल दि ओर उनदेरवेअर मैन आ गये तबि मैने देखा

      पपा कि उनदेरवेअर आगे से फूलि हुइ है मैने पपा से कहा पपा साप अपकि उनदेवेअर मिअन गुस्सह गया है उसको भि निकलो पप ने झत से उसको भि निकल दिया अब पपा एक दुम ननगे थे उनका 10 इनच का मोता गुलबि लुनद हवा मैन लह रा रहा था मैन पपा से बोलि ये कया है पपा बोले अरे सुमि इसको एनगलिश मैन पेनिस ओर हिनदि मैन लुनद कते है ओर मजेदर बत ये है कि तुम इसि लुनद कि वजह से पेदा हुइ हो।आओ इसको चुकर देखो मैने उसको अपने मुलयम हथो मैन पकदा, मुझे अचचा लगा मैने उसको पिचे कि ओर खिनचा तो उसकि चमदि निचे आ गयि ओर उसका सुपदा दिखने लगा पपा ने कहा मजा चति हो, मैन कहा हन ,वो बोले कि तो इसको इसेसरेअमे कि जैसे चूसो मैन पपा कि बात मनि ओर चूसने लगि पपा क मुह से आहे निकलने लगि आआआह्हह्हह्हह्हह्ह मेरि बेति सीईईई कया जदू है तुमहरे गुलबि होथो मैन मजा आ गया ओर जोरसे पूरा मुह मैन लो सीईईईईईईईइ ऊऊऊऊऊऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ मैन भि मजे से उसको चूस रहि थि जितन जयदा चूसति वोह उतना हि तनता जा रहा था कि तभि, पपा ने अपना लुनद मेरे मुह से निकल लिया मुझसे मेरि पयरि चिज़ स्सहिन गयि पपा ने कहा अब मैन तेरि चुत को चूसूनगा मैन शरमा गयि पपा ने मुझको गोध मैन उथया ओर बेद पे लिता मेरि तनगे चोदी कर दि ओर मेरे होथो पे किस्स किया ओर फिर मेरे गुलबि मुनिया को चतने लगे उनकि जिब मुझे तदपा रहि थि मेरि सिसकियन फिर सुसरु हो गयि अह्हह्हह्हह्हह उफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ सीईईईई औऊऊऊऊऊउ मुमीईईईईईईईईईईइ ओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह आआआआआआआआआआआआह्हह्हह्हह्ह सीईईईईईईईईइऐइ पपप कया मजा आ रहा है पपा जोरजोरसे चोसने लगे तभि उनहोने चूसना बनध कर क मेरि तनगू को अपने कनधे पे उथया ओर अपना मोता लुनद मेरि चुत पे रघद कर कहा अब तेरि चुत को चोदुनगा ओर इतना केह कर एक जबरदसत पोवेरफ़ुल झतका मरा मेरि सनस अतक गयि मैन बोलि म्मम्मार दला रीईईईईई मेरि चुत फत गयि उफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ पपा मुझको नहि सिखनि चुअदै अपना लुनद बहर निकलो पपा ने मेरि एक ना सुनि ओर मेरि चुनचिओन को मसलते हुअ धिरे धिरे अपने लुनद को आगे पिस्सहे करने लगी मुझे थोदा अरम अया ओर अब मजा भि आ रहा था पपा बोले बेति मजा आ रहा है कि नहि, माइन बोलि पपा बहुत मजा अ रहा है जरा जोर से चोदेये मेरि चुत मिअन, पपा ने जोर जोर क झतके मरने सुरु कर दिये पपा का हर झतका मुझको मजा दे रहा था मिन सिसकियन ले रहि थि प्पप्पप्पप्पपाआआआअ आज तक मुझे कयुन नहि चोदा चूदे पपा चोदो आअह्हह्हह्हह्ह फ़द्दलो सीईईईइ ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ मरो जोरसे जहतके सीई आआअह्हह्हह्हह्हह्ह पपा ने अपनि रफ़तर बधा दि निचे से मैन अपने चुतदू को हवा मिअन उचल रहि थि कि तबि मेरि चुत से कुच निकलने को हुअ मैन पापा से बोलि पपा मेरि चुत से कुच निकलने वला है पपा बोले सुमि वोह तुमहरि चुत का चुत्रस है मैन भि झदने वला हून पपा बोले, मेरा विरया पिना पसनद करोगि या फिर चुत मैन हि झद जऊ मैन बोलि चुत मैन फिर कभि आज तो पिला दो तबि मेरि चुत से जोर कि पिचकरि चूथि मैन बोलि सीईईईईईईई आआआह्हह्हह्हह्हह्ह मैन तोइ गयीईई पपा मुझीईईई समभलूऊऊओ पपा ने मेरे होथ चुस्सने सुरु करदिये ओर मेरि चुचियोन को मसलने लगे तभि पपा उथै ओर अपने लुनद को आगे पिचे करने(मुथियने) लगे ओर मेरे मुह पे एक जोरदरपिसकरि चूथि मैन उस गरम रस को पिने लगि सुच मैन बहुत हि मजेदर तहा पपा अपने लुनद को मुथियते जा रहे थे ओर रस निकलता जा रहा था मैने पपा क लुनद क विरया कि एक एक बुनदपि गयि मजा आ गया पपा उथे ओर बोले सुमि मजा आया मैन बोलि हान पपा पर ,एक वदा किजिये वो बोले कि कया, मैन बोलि कि आप मुझको ऐसी हि चोदेनगे ओर रोज़ना चोदेनगे पपा ना हन मिअन हन मिलयि ओर हुम नहने चले गये ,

      तो दोसतो कैसे लगि मेरि कहनि ‘पपा ने चोद दिया’ उमिद करति हून आपको पसनद आयि होगि अगलि बर मेरि चुदै पपा से ओर वोह भि बलुए फ़िलम कि सतयले मे तब तक


  7. लो भई, पंडित जी हंसाने में लगे हैं और कविराज हँसना तो दूर, नव निर्माण में लग गये..और नयी नयी शब्दावली बना कर डरा रहे हैं:

    अर्द्धचेतन-नृत्य* करवाते रहो, जब तक
    ना करे मातृ-चरण-वंदन* बेचारा
    फिर भी गर ना चुमे-चरण
    दिखा दो कष्ट-निवारक-गलियारा*

    –वैसे पंडित जी, वो पिस्तौल वाला मामला जमा.🙂🙂

  8. Shrish Says:

    @ गिरिराज जोशी,
    कोई बात नहीं जी नए वाली शोले में यही सीन फिट करवा देते हैं। सोचिए कितना खौफनाक होगा – एक तो गब्बर ऊपर से कविराज। जय और वीरु भी भाग जाएगें।🙂

    मौके पर ही कमाल की कविता रची है आपने।


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: