हे संतजनों, १५-१६ दिन की मेहनत के बाद पंडित जी ने आखिर वर्डप्रैस.कॉम वाली धर्मशाला छोड़कर ब्लॉगर धाम की राह पकड़ ही ली।

पहले सारा किस्सा यहीं लिख दिया था लेकिन फिर सोचा अब यहाँ से जा ही रहे हैं तो सब कुछ वहीं लिखेंगे। तो भाइयों बाकी की कथा ब्लॉगर के नए मकान पर यहाँ पढ़िए और टिप्पणियाँ भी वहीं कीजिए। वहाँ जाकर सब बताऊँगा कि ये घर छोड़कर वहाँ जाने का निर्णय क्यों लिया।

नए घर का पता है: http://ePandit.BlogSpot.com

नारदमुनि वैसे तो अन्तर्यामी हैं, लेकिन फिर भी शीघ्र कार्यवाही हेतु उनको खबर कर दी है।

इस चिट्ठे पर अब कभी-कभार टैस्टिंग हेतु या विशेष परिस्थियों में ही पोस्टिंग की जाएगी। कृपया अपने बुकमार्क आदि अपडेट कर लें तथा आगे से सभी टिप्पणियाँ वहीं करें।

अच्छा वर्डप्रैस.कॉम सेठ अब आज्ञा दीजिए। “बहुत बेआबरु होकर तेरी महफिल…”

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कल रविरतलामी जी के ब्लॉग पर पढ़ा कि BSNL ने नए साल में ब्रॉडबैंड दरों में कमी की घोषणा की है। तो जी गया खुशी-खुशी BSNL की साइट पर। कुल किराया नहीं घटाया गया है बल्कि डाटा ट्रांसफर लिमिट (Download/Upload Limit) बढ़ा दी गई है तथा लिमिट से ज्यादा प्रयोग का शुल्क (Additional Usage Charge) घटा दिया गया है। खैर यह भी काफी अच्छा समाचार है।

स्टार्ट अप प्लान २५० जिसमें २५० रुपए महीने में ४०० एमबी लिमिट थी बढ़ा कर १ जीबी कर दी गई है। लिमिट से अतिरिक्त प्रयोग का शुल्क (एडीशनल यूसेज चार्ज) भी १.४० रुपए से घटाकर ०.९० रुपए कर दिया गया है।

होम प्लान ५०० जिसमें ५०० रुपए महीने में १ जीबी लिमिट थी बढ़ा कर २.५ जीबी कर दी गई है। एडीशनल यूसेज चार्ज भी घटाकर ०.८० रुपए कर दिया है।

होम प्लान ९०० (अनलिमिटेड डाटा ट्रांसफर) में कोई परिवर्तन नहीं है।

उपरोक्त तीनों प्लानों की स्पीड २५६ केबीपीएस है। होम प्लान ५०० में रात २.०० बजे से सुबह ८.०० बजे तक (Night Unlimited) तक डाटा ट्रांसफर मुफ्त है। तो इस प्लान वाले भाईलोग रात को डाउनलोड वगैरा किया करते हैं।

मैंने डायल-अप कनेक्शन से तंग आकर अगस्त में डाटावन ब्रॉडबैंड कनेक्शन लिया था। शुरुआत स्टार्ट अप प्लान २५० (लिमिट ४०० एमबी) से की थी। पहले महीने तो संयम से काम लिया और डाटा ट्रांसफर हुआ 408.874 MB. सितम्बर में जरा ढीला पड़ गया। ब्रॉडबैंड की स्पीड में बहक गया, रात-दिन की सर्फिंग और डाउनलोड पर डाउनलोड तो जी डाटा ट्रांसफर हुआ 1517.273 MB. अक्तूबर में 1275.889 MB और नवंबर में 1438.075 MB. तो भईया टेलीफोन बिल आया क्रमशः ४००० रुपए और लगभग १५०० रुपए। लो जी घरवाले पीछे पड़ गए बंद कर यह आफत, कटवा दे कनेक्शन। तो जनाब जाकर प्लान बदल कर ले लिया होम प्लान ५०० (१ जीबी लिमिट वाला) अब दिसंबर से उसी को प्रयोग कर रहा हूँ। दिन में सर्फिंग करता हूँ और रात को उल्लू की तरह जागकर डाउनलोड। इसका फल अच्छा आया और दिसंबर में ट्रांसफर रहा 938.790 MB (फ्री घंटे निकालकर) तथा 3.109 GB (फ्री घंटो को मिलाकर) अर्थात कुल मिलाकर लिमिट में ही रहा।

अब चूंकि BSNL ने मेरे वाले प्लान की लिमिट बढ़ाकर २.५ जीबी कर दी है तो अब लिमिट पार होने का खतरा नहीं रहा। अपनी कमियों के बावजूद कम से कम हम छोटे शहर वालों के लिए BSNL ही एकमात्र सहारा है। वैसे मेरे शहर (यमुनानगर) में कुछ समय पहले Sify वालों का iway भी शुरु हुआ था तथा शायद Airtel का भी ब्रॉडबैंड शुरु होने वाला/हो चुका है परंतु वे बहुत महंगे हैं।

BSNL ब्रॉडबैंड सेवा के सभी प्लानों का विस्तृत ब्यौरा यहाँ पढ़ें

सभी डाटावन उपभोक्ताओं को बधाई ! जुग-जुग जियो BSNL और शुल्क घटाते रहो। 😛

पिछले तीन दिन से मेरा BSNL का ब्रॉडबैंड कनेक्शन ठप था। रविवार सुबह बड़े अच्छे मूड में था कि छुट्टी का दिन मजे से संजाल पर बिताया जाए। लो जी संजाल पर जाने के लिए लॉग‍इन करने लगा तो संदेश मिला:

Error 678 – The remote computer is not responding.

इस संदेश से मुझे डायल‍अप के जमाने से ही नफरत है जहाँ यह संदेश मिला समझो गई भैंस पानी में। खैर थोड़े-थोड़े समय अंतराल के बाद बार-बार कोशिश की लेकिन कनेक्ट नहीं हुआ। लो जी किया BSNL वालों के दिए मोबाइल नंबर पर फोन तो जैसी उम्मीद थी पहले तो बोले फोन ठीक है, मोडेम ठीक है, LAN कार्ड ठीक है। ये इन लोगों का नियम होता है कि अपनी गलती न मानकर अगले को ही बोलते हैं कि तुम्हारे ही सिस्टम में प्रॉब्लम होगा। पहली बार जब ये कनेक्शन लगाने आये तो बोले कि LAN कार्ड जरुरी है उसके बिना सेट‍अप नहीं हो सकता तब मैंने अपने कम्प्यूटर वाले की मदद से USB से कनेक्शन सेट किया था। खैर मैंने कहा सब एकदम ठीक है जी, फिर बोले भईया आज तो रविवार है कुछ नहीं हो सकता कल फोन करना …

अगले दिन सोमवार को फोन किया तो बोले मोडेम पर लिंक वाला इंडीकेटर नहीं आ रहा न, मैंने कहा हाँ भई हाँ। बोले इधर पीछे से ही प्रॉब्लम आ रहा है कल तक ठीक हो जाएगा …

अगले दिन मंगलवार को भी यही कहानी दोहराई गई। और आज बुधवार को जाकर ठीक हुआ। शुक्र राम जी का, मैं तो सोच रहा था कि अब शायद १०-१५ दिन बाद जाकर ही ठीक हो पाएगा। लाख पब्लिसिटी कर ले BSNL कि मैं देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी हूँ लेकिन काम करने का वही सरकारी तरीका, और एक फॉल्ट दूर करने में तीन दिन लगाता है। भगवान मालिक है !

एक बार सोचा BSNL का Netone वाला डायल‍अप अकाऊंट ही प्रयोग करुं लेकिन वही पुरानी समस्या कनेक्ट बाद में होता है डिसकनेक्ट पहले हो जाता है। डायल‍अप के बारे में अपनी दुख भरी कहानी फिर कभी तफसील से बयान करुंगा।

तीन दिन ऑफलाइन जिंदगी कैसे गुजरी मैं ही जानता हूँ। कुछ तो पहले से ही इंटरनेट किए बिना खाना हजम नहीं होता था ऊपर से आजकल सुबह शाम चिट्ठे पढ़े बिना नींद भी नहीं आती। नारद जी की याद सताती थी। सोचता था परिचर्चा, चिट्ठा-चर्चा में क्या चल रहा होगा आदि-आदि।

खुदा ऐसे बुरे दिन खुदा को भी न दिखाये !smile_embaressed

अपडेट: अभी-अभी पता चला है कि संत कबीर ने सालों पहले इस व्यथा को समझ लिया था। कविवर समीरलाल जी ने इस सत्य को यहाँ दोहा नंबर- एक में उदघाटित किया है। धन्य हैं हे कवीन्द्र आप, इसी लिए तो कहा गया है – “जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि”

जब से हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रवेश किया है अक्सर चिट्ठाकार बंधु मेरे नाम की वर्तनी गलत लिख देते हैं जैसे ‘शिरिष‘, शिरीष‘, ‘शिरिश‘, शीरीश‘, ‘श्रिश‘, ‘श्रीरीश‘ आदि जो कि ‘श्रीश’ होना चाहिए। उपरोक्त लोगों की गलती नहीं है, मेरा नाम ही जरा विशेष प्रकार का है। इसलिए मैं आपको इसकी वर्तनी तथा अर्थ बताता हूँ।

‘श्रीश’ शब्द का अर्थ:

‘श्रीश’ शब्द का संधिविच्छेद है – ‘श्री:+ईश’‘श्री’ माने लक्ष्मी और ‘ईश’ माने ‘स्वामी या पति’ अर्थात ‘भगवान विष्णु’। यह नाम मेरे पिताजी ने रखा था जो संस्कृत के प्रवक्ता हैं। मेरे जन्म-नक्षत्र के हिसाब से नाम ‘स’ अक्षर से बनता था अत: उन्होंने ‘श्री विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्र’ के निम्न श्लोक से नाम चुना।

श्रीदः श्रीश: श्रीनिवास: श्रीनिधि: श्रीविभावनः । श्रीधरः श्रीकरः श्रेयः श्रीमाँल्लोकत्रयाश्रयः ॥७८॥

‘श्रीश’ तथा ‘शिरीष’ में भ्रमित न हों, ‘शिरीष’ एक पुष्प का नाम है। मेरे नाम को लिखने तथा बोलने में हमेशा से ही लोगों को जरा भ्रम रहा है। पर इसी नाम के कारण ही मेरी अक्सर पहचान बन जाती है। बचपन में लगता था कि पिताजी ने कैसा कठिन नाम रखा पर अब समझ आता है कि यह एक श्रेष्ठ नाम है।

‘श्रीश’ लिखा कैसे जाए:

‘श्रीमान’ वाला ‘श्री’ तथा ‘शलगम’ वाला ‘श’ लेकर ‘श्रीश’ बनता है।

BarahaIME तथा HindiWriter में कुँजियाँ दबाइए: shrIsha

Hindi Indic IME में कुँजियाँ दबाइए: shreesha

आशा है अब सभी चिट्ठाकार बंधु मेरा नाम लिखने में कठिनाई नहीं महसूस करेंगें। अब तक आप लोग तसल्ली पूर्वक बोर हो चुके होंगें इसलिए लीजिए नाम संबंधी यह चुटकुला सुनिए।

मूल चुटकुला (संस्कृत में):

मम नाम …..

जेम्स् बाण्ड् हैदराबादनगरम् आगतवान् । तस्य निरीक्षायामेव आसीत् क्श्चन कारयानचालक: । यानं प्रस्थितम् । बाण्ड् स्वशैल्या परिचयम् आरब्धवान् – ‘अहं बाण्ड् … जेम्स् बाण्ड् । भवान् ?’

चालकः अवदत् – ‘अहं सायी । शिववेङ्कटसायी । लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी । श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी । सीतारामञ्जनेयुलु राजशेखर-श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायण …….’

बाण्ड् गच्छतः यानात् कूर्दनं कृत्वा अधावत् ।

सम्भाषण – सन्देशः मार्च २००६ से साभार

हिन्दी अनुवाद:

मेरा नाम …..

एक बार जेम्स बॉण्ड हैदराबादनगर में आया। वहाँ उसकी देखरेख में कोई कार्य संपन्न होना था। वह एक कार में बैठकर चल पड़ा। बॉण्ड अपनी शैली (स्टाइल) में परिचय देने लगा – मैं बॉण्ड … जेम्स बॉण्ड। आप ?

चालक (ड्राइवर) बोला – मैं सायी। शिववेङ्कटसायी। लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी। श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायणशिववेङ्कटसायी। सीतारामञ्जनेयुलु राजशेखर-श्रीनिवाससुलु लक्ष्मीनारायण …….

बॉण्ड चलती हुई कार से कूदकर भाग गया।

॥श्री गणेशाय नमः॥ ॥सरस्वत्यै नमः॥ ॥महर्षि अगस्त्य विजयते॥

॥तुंगेश्वराय नमः॥ ॥जय बद्री विशाल॥ ॥जय बाबा केदारनाथ॥

नमस्कार आप लोग सोच रहे होंगे कि ई-पंडित ने तो आते ही मंत्र पढ़ने शुरु कर दिये। दरअसल हमारे यहाँ रिवाज है कि नया काम शुरु करने से पहले इष्टदेव को याद करते हैं। खैर, काफी दिन से हिन्दी में लिखने की सोच रहा था, कोई २-३ महीने पहले हिन्दी चिट्ठाजगत से परिचय हुआ। हुआ यह कि एक बार मैं देवेंद्र परख जी का HindiWriter प्रयोग कर रहा था तो सोचा गूगल पर कुछ हिन्दी शब्द खोज कर देखूं कि क्या होता है।तो भाई HindiWriter से टाइप करके गूगल में डाला तो कुछ हिन्दी चिट्ठों (ब्लॉग्स) पर पहुँचा, फिर क्या था एक चिट्ठे से दूसरे चिट्ठे पर चलता ही गया।

पहले मैं सोचता था कि हिन्दी कुछ अखबारी और सरकारी साइटों तक ही सींमित है परंतु मुझे पता लगा कि चिट्ठों के माध्यम से हिन्दी नेट पर तेजी से पैर पसार रही है। फिर एक दिन रमण कौल जी से मुझे परिचर्चा और गूगल चिट्ठाकार समूह का पता चला। बाद में ज्ञात हुआ कि हिन्दी चिट्ठाकारी को सर्वमान्य, सर्वप्रिय बनाने में अक्षरग्राम परिवार का काफी योगदान है (इस बारे में विस्तार से फिर लिखूँगा)। खैर तभी से सोच रहा था कि अब हिन्दी चिट्ठा शुरु करुँ, आखिर वह दिन आ ही गया।

हिन्दी चिट्ठाजगत में इस नवप्रवेशी चिट्ठाकार को आप सब की शुभकामनांए इच्छित हैं।