ब्लॉगिंग ने वेब को दोतरफा संवाद माध्यम में बदल दिया है। सभी ब्लॉगर चाहते हैं कि ब्लॉग लिखना सरलतम तथा आनंददायक काम बने। अधिकतर ब्लॉगर ब्लॉगिंग सर्विस के वेब आधारित अंतर्निमित एडीटर से लिखना शुरु करते हैं जिससे काम तो चल जाता है पर इसमें अधिक फंक्शनैलिटी नहीं होती। अगर ऐतिहासिक दृष्टि से बात करें तो सबसे पहले डेस्कटॉप ब्लॉगिंग टूल आये जैसे w.Bloggar तथा BlogJet आदि। इसके बाद नंबर आता है ब्राउजर आधारित टूल्स का जैसे Flock तथा Performancing. इसी श्रृखंला में नवीनतम हैं MS Word 2007 का अंतर्निमित ब्लॉग एडीटर था Windows Live Writer।

जहाँ तक बात है ब्लॉगिंग सर्विस के वेब आधारित अंतर्निमित एडीटर की तो उसके के उपयोग में दो नुक्सान हैं एक तो वहाँ उपलब्ध Rich Text Editor सीमित संसाधन युक्त होत है मतलब उसमें फंक्शन कम होते हैं साथ ही लिखने की जगह भी बहुत सीमित सी होती है दूसरा नुक्सान है आपको ऑनलाइन रहते हुए लिखना पड़ता है जिससे मेरे जैसे सीमित इंटरनेट कनेक्शन वाले को बिल की ही चिंता सताती रहती है। डेस्कटॉप ब्लॉगिंग टूल एक रिच टेक्स्ट एडीटर/वर्ड प्रोसेसर जैसा टूल होता है जिसमें ब्लॉगिंग सबधित कई फंक्शन होते हैं। आप ऑफलाइन रह कर पोस्ट लिखते हो, उसे सजाते संवारते हो, काम फाइनल हो जाने पर ऑनलाइन होकर पोस्ट प्रकाशित (Publish) कर देते हो। पोस्ट को ड्राफ्ट के रूप में सहेजने (Save) करने की सुविधा के कारण आप उसे कई चरणों में लिख सकते हैं। ब्राउजर आधारित टूल वेब आधारित तथा डेस्कटॉप आधारित टॄल्स के बीच की चीज है। इनमें Performaing जो कि एक फायरफॉक्स एड-ऑन है काफी उन्नत है परंतु डेस्कटॉप ब्लॉगिंग टूल इन तीनों प्रकार के टूल्स में बाजी मार ले जाते हैं अब तक जो टूल विंडोज उपयोगकर्ताओं द्वारा सर्वाधिक प्रयोग हो रहा था वह है w.bloggar पर एक तो अब इसका डेवलपमेंट मंद पड़ गया है। दूसरा Windows Live Writer की विशिष्ट खूबियों के चलते यह इस दौड़ में पिछड़ गया है।

बिल्लू भैया एंड कंपनी ने १३ अगस्त २००६ को बहुत काम का औजार निकाला विंडोज लाइव राइटर। यद्यपि यह Live Spaces को ध्यान में रखकर बनाया गया था परंतु यह अधिकतर ब्लॉगिंग सेवाओं पर कार्य कर लेता है। इसका लेआउट माइक्रोसॉफ्ट वर्ड जैसा है, यह अभी बीटा चरण में है तथापि काफी अच्छा कार्य करता है।

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विंडोज लाइव राइटर में बहुत सी विशेषताएं हैं जैसे WYSIWYG या HTML मोड में पूर्वालोकन, आसान फोटो-पब्लिशिंग, श्रेणियाँ (Tagging) तथा अधिकतर ब्लॉगिंग प्लेटफार्म हेतु सपोर्ट परंतु यह सब तो पुराने डेस्कटॉप क्लाइंट यथा w.bloggar आदि में भी था। इसे उन सब से अलग बनाती हैं कुछ निम्नलिखित खूबियाँ:

  • “Web Layout” मोड में लेखन जिससे आप को लगता है कि जैसे आप साक्षात अपने ब्लॉग में लिख रहे हों। आपको लिखते हुए पोस्ट जैसी दिखाई देगी, पब्लिश होने पर ठीक वैसी ही होगी।
  • इसमें प्ल्ग‍इन फंक्शनैलिटी है जिसके द्वारा इसमें नये फीचर जोड़े जा सकते हैं। (फायरफॉक्स एक्सटेंशनों की तरह)

इसका इंटरफेस साफ-सुथरा है तथा माइक्रोसॉफ्ट-वर्ड से मिलता जुलता है। इतना ही नहीं इसकी शब्द-संपादन कार्य-प्रणाली भी वर्ड जैसी ही है जिससे की नये प्रयोगकर्ताओं को इसे सीखने में वक्त नहीं लगता जो कि इसके प्रचलन का एक प्रमुख कारण भी है। साथ ही वर्तनी जाँचक की सुविधा भी है लेकिन यह इंग्लिश तक सीमित है।

WLW_Add New Weblog

इसको इंस्टाल करना w.bloggar आदि अन्य टूल्स की तुलना में अत्यंत आसान है। बस अपना ब्लॉग का URL, य़ूजरनेम तथा पासवर्ड दीजिए तथा बाकी काम यह स्वयं कर लेगा। यह लॉग‍इन करके Weblog Style तथा अन्य फाइलें डाउनलोड कर लेता है। अगर आप इंटरनेट एक्सप्लोरर प्रयोग करते हैं तो इसमें उसके लिए एक टूलबार इंस्टाल करने का विकल्प भी है लेकिन मेरी तरह कई लोग टूलबार पसंद नहीं करते। इसके अतिरिक्त यह नये यूजरों के लिए Live Spaces के लिए साइनअप करने का भी विकल्प देता है पर हिन्दी ब्लॉगर लाइव स्पेसिज का प्रयोग नहीं करते।

जब आप WLW को पहली बार स्टार्ट करते हैं तो यह एक new, blank पोस्ट दिखाता है। यह आपके ब्लॉग के CSS को डाउनलोड कर लेता है तथा आपके ब्लॉग का एक काल्पनिक वर्जन बना देता है जिससे आपको लगता है कि जैसे आप सीधे ही अपने ब्लॉग में लिख रहे हों। आजकल ज्यादातर ब्लॉग एडीटरों में WYSIWYG (What You See Is What You Get अर्थात जैसा देखो वैसा प्राप्त होगा) होता है लेकिन WLW इस सबसे एक कदम आगे है यह आपके ब्लॉग का Template इस्तेमाल करता है जिससे आप जिसके रंग, चौड़ाई आदि आपके ब्लॉग जितनी ही होती है जिससे कि एडीटर स्क्रीन बिल्कुल आपके ब्लॉग जैसी ही दिखाई देती है। इसमें तीन WYSIWYG मोड हैं – Normal, Web Layout तथा Web Preview. मैं वेब लेआउट मोड में लिखता हूँ। वेब प्रिव्यू मोड में यह आपका ब्लॉग नई सामग्री के साथ दिखाता है जिससे ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि आपने पोस्ट को पब्लिश कर दिया हो।

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नीचे Post Properties तथा Trackbacks bar है जिसमें आप पोस्ट संबंधी विभिन्न विकल्प जैसे Time Stamp, Keywords, Comments तथा Trackback संबंधी विकल्प तथा Trackback भेजने के लिए URL आदि कॉन्फिगर कर सकते हैं। ऊपर दाईं तरफ आप पोस्ट के लिए श्रेणियाँ चुन सकते हैं जिसे WLW आपके ब्लॉग से खोज लेता है। आप ड्रॉफ्ट को अपने कम्यूटर तथा ब्लॉग सर्वर दोनों पर सहेज सकते हैं। ऊपर टूलबार से पब्लिश ड्रॉप-डाउन बॉक्स से आप अपनी पोस्ट को ड्रॉफ्ट के रुप में ब्लॉग पर सहेज सकते हैं अथवा सीधे पोस्ट कर सकते हैं। पिछली पोस्टों को खोला तथा संपादित भी किया जा सकता है। एक फीचर Map Publishing जिसमें यह Live.com Maps ब्लॉग का प्रयोग करता है पर यह फीचर ज्यादा प्रयोग नहीं होती।

प्लगइन

माइक्रोसॉफ्ट ने WLW के लिए SDK (Application API) जारी किया है जिसके द्वारा डेवेलपर इसके लिए प्ल्गइन बनाकर इसमें नये फीचर्स जोड़ सकते हैं। यह फायरफॉक्स एक्स्टेम्शनों (जिन्हें संस्करण २.० से एड-ऑन कहा जा रहा है) जैसी ही सुविधा है जो कि फायरफॉक्स के लोकप्रिय होने का एक प्रमुख कारण था यही बात WLW के लिए भी कही जा सकती है। इस तरह का काम माइक्रोसॉफ्ट ने मेरे विचार से पहली बार किया है। 🙂

प्लगइन जमा कराने तथा डाउनलोड के लिए लाइव गैलरी है इसके अतिरिक्त कुछ अन-ऑफिशियल साइटों से भी इन्हें डाउनलोड किया जा सकता है।

फोटोपब्लिशिंग

अपने कम्प्यूटर अथवा वेब से फोटो पोस्ट में डाली जा सकती है, इसके अतिरिक्त फ्लिकर से फोटो डालने के लिए भी प्लगइन उपलब्ध हैं। यह फोटो को अपने आप रीसाइज कर लेता है तथा उसका थम्बनेल डाल देता है जिस पर क्लिक करने से मूल इमेज पर जाया जा सकता है। इसके अतितिक्त इमेज संबंधी बहुत विकल्प हैं जिनमें drop shadow, adjusting brightness, contrast, sharpen, emboss तथा अन्य इफेक्ट शामिल हैं। आप इमेजिस को FTP सर्वर पर भी अपलोड कर सकते हैं।

पॉडकास्टिंग

ऑडियो तथा वीडियो पोस्ट करने हेतु कुछ प्लगइन उपलब्ध हैं लेकिन चूंकि मैं वर्डप्रैस.कॉम प्रयोग करता हूँ जिसमें इन्हें केवल एक लाइन लिखकर पोस्ट किया जा सकता है अतः इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दे सकता।

कमियाँ

कमियाँ हर चीज में होती हैं तथा WLW इसका अपवाद नहीं है। जब भी आप एक नई पोस्ट अथवा ड्रॉफ्ट बनाना चाहते हैं एक नई विंडो खुल जाती है जो कि काफी खीझ भरा है। इसी तरह फाइल मीनू में Close Post जैसा विकल्प भी नहीं है।

अगर किसी पुरानी पोस्ट को संपादित करें तथा उसमें <!- -more- -> टैग हो जिसे कि “continue reading” संवाद के लिए प्रयोग किया जाता है तो यह केवल उपरोक्त टैग से पहले तक की ही पोस्ट दिखाएगा बाद की नहीं।

इसके अतिरिक्त भी इसमें कई कमियाँ हैं परंतु चूंकि यह अभी बीटा स्टेज में है इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि फाइनल संस्करण में इन्हें दूर कर लिया जाएगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि आप WLW ग्रुप फोरम में इन के बारे में बता सकते हैं तथा WLW टीम इस बारें में सुनती है और आपके प्रश्नों का जवाब देती है।

उपसंहार

अगर तो आपको संक्षिप्त पोस्ट लिखनी हो जिसमें विशेष फॉर्मेटिंग की आवश्यकता न हो तो ब्लॉग-सेवा के वेब आधारित इंटरफेस का प्रयोग करें परंतु यदि आपको लंबी तथा सजा-संवार कर पोस्ट लिखनी हो तो WLW से अच्छा कुछ नहीं। मैं तो अब छोटी से छोटी पोस्ट भी इसमें लिखता हूँ। एक बार प्रयोग शुरु करने के बाद आपको भी इसकी आदत हो जाएगी जिसके बाद सीमित सुविधा वाले वेब-आधारित एडीटर में लिखने का मन ही नहीं करता। ‘फुरसतिया’ जी के लिए तो मैं इसे खास रिकमेन्ड करूँगा।

अब चिट्ठाकारी न करने का कोई बहाना नहीं चलेगा। smile_nerd

नोट: कल WLW की प्रैक्टिकल क्लास लगेगी। इस लिए सभी छात्र हाजिर रहें। ‘कविराज’ सुन रहे हैं न।

संबंधित कड़ियाँ

Writer Zone (WLW ब्लॉग)
विंडोज लाइव राइटर डाउनलोड
विंडोज लाइव राइटर फोरम ग्रुप
विंडोज लाइव गैलरी (WLW प्लगइन ऑफीशियल साइट)
wlwplugins.com (WLW प्लगइन अनऑफीशियल साइट)

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दो दिनों से घर से बाहर था। आकर पता चला कि मुझे ‘उदीयमान चिट्ठाकार २००६’ के प्रथम चरण के १२ उम्मीदवारों में चुन लिया गया है। चिट्ठाजगत में आये हुए मुझे अभी २ महीने ही हुए हैं दूसरे शब्दों में कहूँ तो मुझे अभी पूरा मौका भी नहीं मिला। लेकिन फिर भी निर्णायक मंडल ने मुझे इस योग्य समझा इस हेतु मैं उनका आभार व्यक्त करता हूँ। वरिष्ठ चिट्ठाकार अनूप भाईसाहब द्वारा कही गई ये पंक्तियाँ भी मेरे लिए इनाम से कम नहीं हैं।

ई-पंडित के नाम से अपना चिट्ठा लिखने वाले श्रीश सबसे नये चिट्ठाकारों में से होने के बावजूद अपने दनादन लेखन से चिट्ठाजगत में काम भर की हलचल मचा चुके हैं। शुरुआती दिनों में श्रीश ने अपना काफी समय अपने नाम की वर्तनी समझाने में लगाया लेकिन लोग हैं कि समझते ही नहीं। अपने देर से लिखना शुरू करने की भरपाई वे ढेर सारे लेखन से कर रहे हैं। तकनीकी लेखन के अलावा हास्य, गंभीर और विचारोत्तेजक लेख लिखकर श्रीशजी मात्र दो माह में एक लोकप्रिय चिट्ठाकार बन चुके हैं। वे अक्सर अपने पाठकों को चुटकुले सुनाकर उनका मनोरंजन भी करते रहते हैं।

यह प्रतियोगिता तो चिट्ठाकारों में आपसी भाईचारा और संवाद बढ़ाने का एक बहाना है। हार-जीत मायने नहीं रखती। वरिष्ठ चिट्ठाकारों द्वारा नए चिट्ठाकारों का उत्साहवर्धन हेतु यह उत्तम उपाय किया गया है। उम्मीद करता हूँ भविष्य में आप लोग इसी तरह मेरा हौंसला बढ़ाते रहेंगे।

Happy New Year

सम्पूर्ण चिट्ठाजगत को मेरी ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

भगवान करे यह वर्ष आप सब के जीवन में अनंत खुशियाँ लेकर आए तथा आप निरंतर जीवन-पथ पर उन्नति करें।

Happy New Year 2007

अब आप रेडियो-झूठिस्तान 420FM से ताजे समाचार सुनिए:

  • घर वालों की शिकायत तथा अपने डुप्लीकेट से तंग आकर जीतू भाई ने चिट्ठाकारी बंद करने का फैसला किया है। कुवैत सरकार ने एक बयान जारी कर इस फैसले पर खुशी जताई है
  • प्रतीक पांडे जी ने सुंदरियों का मोह त्यागकर संन्यास ले लिया है। अब वे ‘टाइमपास’ बंद कर तपस्या करने हेतु हिमालय प्रस्थान करेंगे।
    (अपडेट – सुना है कि इन्द्र उनकी तपस्या भंग करने हेतु कुछ हॉट अप्सराओं को भेजने की तैयारी कर रहे हैं)
  • व्यंग्यराज फुरसतिया महाराज ने टाइपिंग के झमेले से तंग आकर अबसे केवल हायकू लिखने का निर्णय लिया है। उनकी जगह उनके ‘किंग साइज’ व्यंग्य अब आलोक भाई लिखेंगे।
  • एक अत्यंत गोपनीय खबर पता चली है कि स्टार टिप्पणीकार संजय भाई ने एक प्रोग्राम बनाया है जो सबके चिट्ठों पर जाकर स्वतः ही विषयानुसार टिप्पणी कर देगा। उन्होंने आज से इसका परीक्षण भी शुरु कर दिया है। यह आमतौर पर किसी भी पोस्ट पर पहली टिप्पणी करता है।
  • डुप्लीकेट जीतू नामक वायरस का नया वर्जन Duplicate Jitu 2.0 कल रात से जारी हो गया है तथा बहुत तेजी से फैल रहा है। इसकी विशेषता है कि यह दो टिप्पणियाँ करता है जिसमें से दूसरी वाली कुछ इस तरह से होती है:
    ऊपर वाली टिप्पणी मेरी नहीं है। Please avoid it.

शेष समाचार दूसरे बुलेटिन में …

डोंट टेक इट अदरवाइज़, ईस्माईली इज़ अटैच्ड। Hysterical

एक पागल को जेल हो गई। उसने अपना हाथ काटकर जेल से बाहर फैंक दिया।

किसी ने पूछा : यह क्या कर रहे हो ?

पागल ने कहा : मैं किश्तों में बाहर चला जाऊँगा।

दो बेवकूफ लड़के आपस में बातें कर रहे थे।

पहला : मेरे पिताजी अभी तक यह तय नहीं कर पाये हैं कि वे गाय खरीदें या ट्रैक्टर ?

दूसरा : गाय पर सवारी करते हुए तो वे बेवकूफ लगेंगे।

पहला : लेकिन ट्रैक्टर से दूध दुहते हुए समय तो वे और ज्यादा बेवकूफ लगेंगे।

Bruce Lee

ब्रूस ली की फिल्में बचपन में सभी ने देखी होंगी और मेरी तरह पसंद भी करते होंगे लेकिन क्या आपको पता है कि ब्रूस ली हिंदुस्तानी था, यकीन नहीं आया तो ये पढि़ए:

  • ब्रूस ली की पसंदीदा सब्जीMu Lee
  • ब्रूस ली खाना किसमें खाता थाTha Lee
  • थियेटर में क्या होता है जब ब्रूस ली की फिल्म खत्म होती हैKha Lee
  • ब्रूस ली की सिस्टर-इन-लॉ का नामSaa Lee
  • ब्रूस ली का पसंदीदा नाश्ताId Lee
  • ब्रूस ली का पसंदीदा त्यौहार Diwa Lee
  • ब्रूस ली की पसंदीदा अभनेत्रीSona lee
  • ब्रूस ली का पसंदीदा संगीतQawa lee
  • ब्रूस ली अक्सर कौन सा काम करता थाCoo Lee
  • ब्रूस ली कब मराFinal Lee
  • ब्रूस ली कैसे मराwith a Go Lee
  • ब्रूस ली का पसंदीदा हिल स्टेशनKulu Mana Lee
  • ब्रूस ली का निकनेमMawa Lee
  • ब्रूस ली की पसंदीदा हिन्दी फिल्मGharwa LEE Baharwa LEE
  • ब्रूस ली का पसंदीदा क्रिकेटरSaurav Gangu Lee

तो भाई लोग क्या बोलते हो था ब्रूस ली हिन्दुस्तानी या नहीं ?

अगर तुम सोच रहे हो कि मुझे ये सब कैसे पता तो सुनो पिछले जन्म में Bruce Lee मेरा भाई था, मेरा नाम था – Shrish LEE

संबंधित कड़ियाँ:

IMDb पर ब्रूस ली
विकीपीडिया पर ब्रूस ली
फ्लिकर पर ब्रूस ली की कुछ चुनिंदा फोटो

आज एक स्माईली मेरेको मिलने कू आया। मैं बोला कईसा है रे तो बोला क्या बताऊं जी बोत टेन्शन में हूँ। मैंने कहा कायकू भाई आजकल तो तू बोत हिट होरेला है जिसको देखो वई स्माईलगिरी कर रेला है। बोला यई तो लोचा है बाप जबसे वो उड़नस्वामी ने लोगों को अन्यथा नई लेने को बोला है मेरी तो वाट लग गई है। मैं बोला अबे तू तो पोपुलर हो गया यार मैं तो बोलता हूँ आज लास्ट दिन है तू भी चिट्ठा लिखना शुरु कर और चुनाव में खडा़ हो जा। बोला खालीपीली कायकू लेरे ओ बाप, वर्क-लोड एकदम बढ़ गया है, भाई लोग मेरे को सांस नी लेने देरे खासकर टिप्पणियों में। कोई उपाय बताओ ना पंडित जी। मैं बोला ठीक है भाई अपुन ट्राई करता है आगे भाई लोगों की मर्जी। तो भाई लोग आज की क्लास में अपुन बताएगा कि स्माईलगिरी कैसे करने का है।

स्माईलियों का इतिहास भूगोल बताकर बोर नहीं करुंगा जिन को जानना हो नीचे दी गई कड़ियों पर जाएं। स्माईली दो प्रकार के होते हैं – टेक्स्ट तथा ग्राफिक। मैं यहाँ सिर्फ ग्राफिक स्माईली दे रहा हूँ (बिना Quotes के प्रयोग करें)। मेरे विचार से ब्लॉगर ग्राफिक स्माईली नहीं दिखा सकता।

🙂 =”:)” या “:-)” या “:smile:”
😀 = “:D” या “:-D” या “:grin:”
😦 = “:(” या “:-(” या “:sad:”
😮 = “:o” या “:-o” या “:eek:”
😯 = “8O” या “8-O” या “:shock:”
😕 = “:?” या “:-?” या “:???:”
8) = “8)” या “8-)” या “:cool:”
😡 = “:x” या “:-x” या “:mad:”
😛 = “:P” या “:-P” या “:razz:”
😐 = “:|” या “:-|” या “:neutral:”
😉 = “;)” या “;-)” या “:wink:”
😆 = “:lol:”
😳 = “:oops:”
😥 = “:cry:”
👿 = “:evil:”
😈 = “:twisted:”
🙄 = “:roll:”
❗ = “:!:”
❓ = “:?:”
💡 = “:idea:”
➡ = “:arrow:”
:mrgreen: = “:mrgreen:”

फोरमों के मामले में कुछ स्माईली सभी फोरमों के लिए काम नहीं करते। परिचर्चा के लिए स्माईली कोड यहाँ पर दिए गए हैं।

फायरफॉक्स में स्माईली ही स्माईली:

फायरफॉक्स के लिए Smiley Xtra नामक एक्सटेंशन यहाँ से डाउनलोड तथा इंस्टाल करें। इससे Smiley Xtra का आइकॉन फायरफॉक्स के टूलबार पर आ जाएगा।

इस पर क्लिक करने से यह साइडबार में खुल जाएगा।

चिट्ठे पर स्माईली लगाने के लिए HTML एडीटर में जाकर Smiley Xtra के साइडबार में बायें से चौथा आइकॉन तथा परिचर्चा आदि फोरम के लिए पोस्ट एडीटर में जाकर बायें से तीसरा आइकॉन क्लिक करें। इससे क्रमशः HTML तथा BBCode इन्सर्ट हो जाएगा।

विंडोज लाइव राइटर में Spaces Emoticon:

विंडोज लाइव राइटर के लिए Insert Spaces Emoticon प्लग‍इन यहाँ से डाउनलोड तथा इंस्टाल करें। अब WLW में Insert मीनू में जाकर A Spaces Emoticon… पर क्लिक करें।

जिससे नीचे वाली विंडो खुल जाएगी।

बस अपनी पसंद का स्माईली चुनिए और OK क्लिक करिए।

तो भाईलोग स्माईलगिरी करो बिंदास होके। Celebrating

संबंधित कडियाँ:

Smiley के बारे में विकीपीडिया पर
Emoticon के बारे में विकीपीडिया पर
Using Smilies « WordPress Codex

क्या आपको पता है कि आज शहीद उधम सिंह कि जयन्ती है। कोई बात नहीं अगर नहीं भी पता तो जब कहीं इस बारे में बात ही नहीं होती तो कहाँ से पता चले। सब अखबार वालों ने एक पैराग्राफ में इस खबर को निपटा दिया वो भी बिल्कुल अंदर के पृष्टों पर। टीवी वालों की तो बात ही छोड़िए। न ही किसी राजनीतिक दल ने उनको याद किया। पता है क्यों क्योंकि वे आज बिकते नहीं गांधी बिकते हैं। क्योंकि उन्होंने और अन्य शहीदों ने देश को आजाद थोड़े ही न कराया वो तो सिर्फ गांधी ने कराया। कुछ दिन पहले चली थी यह बहस काफी देश में भी और हमारे चिट्ठाजगत में भी। क्या गलत बोले थे रामदेव बाबा। राजनीतिक द्लों ने उन्हें क्यों याद न किया क्योंकि वे कांग्रेस आदि दल में जो न थे। कौन कहता है ये शहीद महान थे, उन्होंने कुर्बानी दी सब झूठ है कुर्बानी तो बस उन्होंने दी न जिनके नाम के पीछे गांधी या नेहरु लगा था। बाघा जतिन को कोई जानता है आज, ये गांधी के आने से बहुत पहले ही एक समय भारत के सबसे प्रसिद्ध नेता थे आज किसी बच्चे को मालूम है लाला हरदयाल कौन थे। वीर सावरकर क्यों हाशिए पर ला दिए गए क्योंकि उनका कसूर मात्र इतना था कि वे हिंदूवादी थे सिर्फ इस गुनाह के कारण उनका सब बलिदान भुला दिया गया। ये सब कैसे हुआ ? आजादी से पहले कांग्रेस का ने इन सब शहीदों का विरोध किया उन्हें आतंकवादी कहा, नेताजी को अपने रास्ते से हटवाया और और आजादी के बाद एक योजना के तहत नई पीढ़ी को उनके बारे में न पढ़ाया जाए न बताया जाए, ऐसा प्रबंध किया जिससे नई पीढ़ी को केवल यह पता हो कि देश को आजाद कराया सिर्फ गांधी और नेहरू ने। क्योंकि ये लोग कांग्रेस से जुडे थे और इनके नाम पे हमेशा हमें वोट मिलता रहे। आज फैशन है कि गांधीवाद का, गांधीगिरी का भगवान को गाली दो लेकिन गांधी की जरा भी आलोचना न करो। अब आप कहेंगे कि इसमें गांधी का क्या कसूर है, है कसूर लेकिन उसकी बात कभी बाद में अलग से करुँगा। हमें पढ़ाया जाता है, बताया जाता है यही सब। गांधी जी ने अफ्रीका से आने के बाद अंग्रेजों की कभी एक लाठी भी न खाई। इन शहीदों ने क्या तप किया, क्यों वे इन गांधी और गांधीभक्तों से भिन्न थे जानना है तो कभी उनकी जीवनियाँ पढ़ो। लेकिन कौन पढ़े लोग कौन सा इनको याद करते हैं उन्हें तो आज मुन्नाभाई की गांधीगिरी देखनी है वो मुन्नाभाई जिस पर ड्र्ग्स, अवैध हथियार तथा लाखों लोगों के कत्ल में शामिल होने के आरोप हैं। किए जाओ भाई गांधीगिरी। महान है ये गांधीगिरी।

क्रांतिवीर उधम सिंह का जन्म पंजाब-प्रांत के ग्राम सुनाम (जनपद – संगरुर) में २६ दिसंबर १८९९ को हुआ था। इनके पिता का नाम टहल सिंह था। वर्ष १९१९ का जलियांवाला बाग का जघन्य नरसंहार उन्होंने अपनी आँखों से देखा था। उन्होंने देखा था कि कुछ ही क्षणों में जलियांवाला बाग खून में नहा गया और असहाय निहत्थे लोगों पर अंग्रेजी शासन का बर्बर अत्याचार और लाशों का अंबार। उन्होंने इसी दिन इस नरसंहार के नायक जनरल डायर से बदला लेने की प्रतिज्ञा की थी। प्रतिशोध की आग में जलते हुए यह नर-पुंगव दक्षिण-अफ्रीका तथा अमरीका होते हुए वर्ष १९२३ में इंग्लैंड पहुँचा। वर्ष १९२८ में भगतसिंह के बुलाने पर उन्हें भारत आना पड़ा। १९३३ में वह पुनः लंदन पहुँचे। तब तक जनरल डायर मर चुका था, किंतु उसके अपराध पर मोहर लगाने वाला सर माइकल-ओ-डायर तथा लॉर्ड जेटलैंड अभी जीवित था।

१३ मार्च १९४० को उन्हें अपने हृदय की धधकती आग को शांत करने का मौका मिला। उस दिन लंदन की एक गोष्ठी में दोनों अपराधी उपस्थित थे। उधमसिंह धीरे-धीरे चुपके से जाकर मंच से कुछ दूरी पर बैठ गए। सर माइकल-ओ-डायर जैसे ही भारत के विरुद्ध उत्तेजक भाषण देने के पश्चात मुड़े, उधमसिंह ने उस पर गोली दाग दी। वह वहीं ढेर हो गया। लॉर्ड जेटलैंड भी बुरी तरह घायल हो गया। सभा में भगदड़ मच गई पर उधमसिंह भागे नहीं। वह दृढ़ता से खड़े रहे और सीना तानकर कहा – “माइकल को मैंने मारा है।” मुकदमा चलने पर अदालत में अपना बयान देते हुए उन्होंने सपष्ट कहा था – “यह काम मैंने किया माइकल असली अपराधी था। उसके साथ ऐसा ही किया जाना चाहिए था। वह मेरे देश की आत्मा को कुचल देना चाहता था। मैंने उसे कुचल दिया। पुरे २१ साल तक मैं बदले की आग में जलता रहा। मुझे खुशी है कि मैंने यह काम पूरा किया। मैं अपने देश के लिए मर रहा हूँ। मेरा इससे बड़ा और कया सम्मान हो सकता है कि मैं मातृभूमि के लिए मरुँ।” इस प्रकार उस मृत्युंजयी बलिदानी ने मातृभूमि के चरणों में हँसते-हँसते अपने प्राणों की भेंट चढ़ा दी। उनका बलिदान हमें देशभक्ति व राष्ट्रीय एकता की भावना की प्रेरणा देता रहेगा।

आज जिस लोक में वे हों क्या उन देशभक्तों को उनकी उपेक्षा पर दुख हो रहा होगा ? बिल्कुल नहीं क्योंकि उनका जीवन गीता के निष्काम कर्म का जीवंत उदाहरण था। उनकी खासियत ही यही थी कि उन्हें बस सरफरोशी की तमन्ना थी बदले में कुछ चाहते होते तो कांग्रेसियों की तरह धरने-सत्याग्रह करते और नेता बनते।

आओ कम से कम हम लोग मिलकर उस शहीद को अपनी श्रद्दांजली दें। हे अमर शहीद हुतात्मा उधम-सिंह तुम्हे जन्मदिन मुबारक ! शत-शत नमन तुम्हारी शहादत को !

संबंधित कड़ियाँ:

विकीपीडिया पर उधम-सिंह पर लेख
दैनिक जागरण में शहीद उधम-सिंह का संक्षिप्त परिचय
Udham Singh – A short biographical sketch